हिंदी मुहावरे [Part 2]

 

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Himachal Pradesh General Knowledge Test Series[40 Full Length Tests]

हिंदी मुहावरे [Part 1]

पेट काटना (अपने भोजन तक में बचत )- अपना पेट काटकर वह अपने छोटे भाई को पढ़ा रहा है।

पानी उतारना (इज्जत लेना )- भरी सभा में द्रोपदी को पानी उतारने की कोशिश की गयी।

पेट में चूहे कूदना (जोर की भूख )- पेट में चूहे कूद रहे है। पहले कुछ खा लूँ, तब तुम्हारी सुनूँगा।

पहाड़ टूट पड़ना (भारी विपत्ति आना )- उस बेचारे पर तो दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पट्टी पढ़ाना (बुरी राय देना)- तुमने मेरे बेटे को कैसी पट्टी पढ़ाई कि वह घर जाता ही नहीं ?

पौ बारह होना (खूब लाभ होना)- क्या पूछना है ! आजकल तुम व्यापारियों के ही तो पौ बारह हैं।

पाँचों उँगलियाँ घी में होना (पूरे लाभ में)- पिछड़े देशों में उद्योगियों और मेहनतकशों की हालत पतली रहती है तथा दलालों, कमीशन एजेण्टों और नौकरशाहों की ही पाँचों उँगलियाँ घी में रहता हैं।

पगड़ी रखना (इज्जत बचाना)- हल्दीघाटी में झाला सरदार ने राजपूतों की पगड़ी रख ली।

पगड़ी उतारना (अपमानित करना)- दहेज-लोभियों ने सीता के पिता की पगड़ी उतार दी।

पानी-पानी होना (अधिक लज्जित होना)- जब धीरज की चोरी पकड़ी गई तो वह पानी-पानी हो गया।

पत्ता कटना (नौकरी छूटना)- मंदी के दौर में मेरी कंपनी में दस लोगों का पत्ता कट गया।

परछाई से भी डरना (बहुत डरना)- राजू तो अपने पिताजी की परछाई से भी डरता है।

पर्दाफाश करना (भेद खोलना)- महेश मुझे बात-बात पर धमकी देता है कि यदि मैं उसकी बात नहीं मानूँगा तो वह मेरा पर्दाफाश कर देगा।

पर्दाफाश होना (भेद खुलना)- रामू ने बहुत छिपाया, पर कल उसका पर्दाफाश हो ही गया।

पल्ला झाड़ना (पीछा छुड़ाना)- मैंने उसे उधार पैसे नहीं दिए तो उसने मुझसे पल्ला झाड़ लिया।

पाँव तले से धरती खिसकना (अत्यधिक घबरा जाना)- बस में जेब कटने पर मेरे पाँव तले से धरती खिसक गई।

पाँव फूलना (डर से घबरा जाना)- जब चोरी पकड़ी गई तो रामू के पाँव फूल गए।

पानी का बुलबुला (क्षणभंगुर, थोड़ी देर का)- संतों ने ठीक ही कहा है- ये जीवन पानी का बुलबुला है।

पानी फेरना (समाप्त या नष्ट कर देना)- मित्र! तुमने तो सब किये कराए पर पानी फेर दिया।

पारा उतरना (क्रोध शान्त होना)- जब मोहन को पैसे मिल गए तो उसका पारा उतर गया।

पारा चढ़ना (क्रोधित होना)- मेरे दादाजी का जरा-सी बात में पारा चढ़ आता है।

पेट का गहरा (भेद छिपाने वाला)- कल्लू पेट का गहरा है, राज की बात नहीं बताता।

पेट का हल्का (कोई बात न छिपा सकने वाला)- रामू पेट का हल्का है, उसे कोई बात बताना बेकार है।

पटरा कर देना (चौपट कर देना)- इस वर्ष के अकाल ने तो पटरा कर दिया।

पट्टी पढ़ाना (गलत सलाह देना)- किसी को पट्टी पढ़ाना अच्छी बात नहीं।

पत्थर का कलेजा (कठोर हृदय व्यक्ति)- शेरसिंह का पत्थर का कलेजा है तभी अपने माता-पिता के देहांत पर उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।

पत्थर की लकीर (पक्की बात)- पंडित जी की बात पत्थर की लकीर है।

पर्दा उठना (भेद प्रकट होना)- आज सच्चाई से पर्दा उठ ही गया कि मुन्ना धनवान है।

पलकों पर बिठाना (बहुत अधिक आदर-स्वागत करना)- रामू ने विदेश से आए बेटों को पलकों पर बिठा लिया।

पलकें बिछाना (बहुत श्रद्धापूर्वक आदर-सत्कार करना)- नेताजी के आने पर सबने पलकें बिछा दीं।

पाँव धोकर पीना (अत्यन्त सेवा-शुश्रुषा और सत्कार करना)- रमा अपनी सासुमाँ के पाँव धोकर पीती है।

पॉकेट गरम करना (घूस देना)- अदालत में पॉकेट गर्म करने के बाद ही रामू का काम हुआ।

पीठ की खाल उधेड़ना (कड़ी सजा देना)- कक्षा में शोर मचाने पर अध्यापक ने रामू की पीठ की खाल उधेड़ दी।

पीठ ठोंकना (शाबाशी देना)- कक्षा में फर्स्ट आने पर अध्यापक ने राजू की पीठ ठोंक दी।

प्राण हथेली पर लेना (जान खतरे में डालना)- सैनिक प्राण हथेली पर लेकर देश की रक्षा करते हैं।

प्राणों पर खेलना (जान जोखिम में डालना)- आचार्य जी डूबती बच्ची को बचाने के लिए अपने प्राणों पर खेल गए।

पंख लगना (विशेष चतुराई के लक्षण प्रकट करना)- मधु के तो पंख लग गए हैं, उसे बहस में हरा पाना आसान नहीं है।

पंथ निहारना/देखना (प्रतीक्षा करना)- गोपियाँ पंथ निहारती रहीं पर कृष्ण कभी वापस न आए।

पत्ता खड़कना (आशंका होना)- अगर यहाँ पत्ता भी खड़केगा तो मुझे खबर मिल जाएगी, इसलिए आप निश्चिंत होकर अपना काम कीजिए।

पर कटना (अशक्त हो जाना)- इस लड़के के पर काटने पड़ेंगे बहुत बक-बक करने लगा है।

पलक-पाँवड़े बिछाना (बहुत श्रद्धापूर्वक स्वागत करना)- गाँधी जी जिस गाँव से भी निकल जाते थे लोग उनके स्वागत में पलक-पाँवड़े बिछा देते थे।

पलकों में रात बीतना (रातभर नींद न आना)- रात को कॉफी क्या पी, पलकों में ही सारी रात बीत गई।

पल्ला छुड़ाना (छुटकारा पाना)- मुझे इस काम में फँसाकर आप मुझसे पल्ला क्यों छुड़ाना चाहते हैं?

पल्ला पकड़ना (आश्रय लेना)- अब पल्ला पकड़ा है तो जीवनभर साथ निभाना होगा।

पसीने की कमाई (मेहनत से कमाई हुई संपत्ति)- भाई साहब! यह मेरे पसीने की कमाई है, मैं ऐसे ही नहीं लुटा सकता।

पाँव पड़ना (बहुत अनुनय-विनय करना)- मेरे पाँव पड़ने से कुछ न होगा, जाकर अपने अध्यापक से माँफी माँगो।

पाँव में बेड़ी पड़ना (स्वतंत्रता नष्ट हो जाना)- मल्लिका का विवाह क्या हुआ बेचारी के पाँवों में बेड़ी पड़ गई है, उसके सास-ससुर उसे कहीं आने-जाने ही नहीं देते।

पाँवों में मेंहदी लगना (कहीं जाने में अशक्त होना)- तुम्हारे पाँवों में क्या मेंहदी लगी है जो तुम बाजार तक जाकर सब्जी भी नहीं ला सकते?

पाँसा पलटना (भाग्य का प्रतिकूल होना)- पता नहीं कब क्या से क्या हो जाए? पाँसा पलटते देर नहीं लगती।

पानी जाना (प्रतिष्ठा नष्ट होना)- मनुष्य का यदि एक बार पानी चला जाए तो दुबारा वैसा ही सम्मान वापस नहीं मिलता।

पानी की तरह रुपया बहाना (अन्धाधुन्ध खर्च करना)- सेठजी ने सेठानी के इलाज पर पानी की तरह रुपया बहाया पर कुछ न हो सका।

पापड़ बेलना (कष्टमय जीवन बिताना, बहुत परिश्रम करना)- कितने पापड़ बेले हैं तब जाकर यह छोटी-सी नौकरी मिली है।

पाप का घड़ा भरना (पाप का पराकाष्ठा पर पहुँचना)- वह दुष्ट समझता था कि उसके पापों का घड़ा कभी भरेगा ही नहीं, पर समय किसी को नहीं छोड़ता।

पार लगाना (उद्धार करना)- ईश्वर पर भरोसा रखो। वे ही हमारी नैया पार लगाएँगे।

पाला पड़ना (वास्ता पड़ना)- मुझसे पाला पड़ा होता तो उसके होश ठिकाने आ जाते।

पासा पलटना (स्थिति उलट जाना)- क्या करें पास ही पलट गया। सोचा कुछ था हो कुछ गया।

पिंड छुड़ाना (पीछा छुड़ाना)- बड़ा दुष्ट है वह। उससे पिंड छुड़ाना बहुत मुश्किल है।

पिल पड़ना (किसी काम के पीछे बुरी तरह लग जाना)- बर्तन में रखे दूध पर बिल्लियाँ ऐसे पिल पड़ीं कि सारा दूध जमीन पर फैल गया।

पीछा छुड़ाना (जान छुड़ाना)- बड़ी मुश्किल से मैं उससे पीछा छुड़ाकर आया हूँ।

पीठ दिखाना (हारकर भागना/पीछे हटना)- पाकिस्तानी सेना पीठ दिखाकर भाग निकली।

पीस डालना (नष्ट कर देना)- जो मुझसे टक्कर लेगा उसे मैं पीस डालूँगा।

पुरजा ढीला होना (व्यक्ति का सनकी हो जाना)- मदन लाल के दिमाग का पुरजा ढीला हो गया है। उसे पता ही नहीं चलता कि क्या बोल रहा है?

पूरा न पड़ना (कमी पड़ना)- मेहमान अधिक आ गए हैं शायद इतना खाना पूरा न पड़े?

पेट पर लात मारना (रोजी ले लेना)- मैं किसी के पेट पर लात मारना नहीं चाहता वरना अब तक तो उसे नौकरी से बाहर कर दिया होता।

पेट पीठ एक होना (बहुत दुर्बल होना)- तीन माह की बीमारी में रमेश के पेट-पीठ एक हो गए हैं।

पेट में दाढ़ी होना (बहुत चालाक होना)- उसे सीधा मत समझना। उसके पेट में दाढ़ी है, किसी भी दिन चकमा दे सकता है।

पेट में बात न पचना (कोई बात छिपा न सकना)- उसे हर बात मत बताया करो क्योंकि उसके पेट में कोई बात नहीं पच ती।

पेट में बल पड़ना (इतना हँसना कि पेट दुखने लगे)- आज सब लोगों ने जो चुटकले सुनाए उन्हें सुनकर सब लोगों के पेट में बल पड़ गए।

पैंतरे बदलना (नई चाल चलना)- रामेश्वर से सावधान रहना। वह हर बार पैंतरे बदलता है।

पैर उखड़ना (भाग जाना)- युद्ध में कौरवों की सेना के पैर उखड़ गए।

पैर न टिकना (कहीं स्थायी रूप से कुछ समय भी न रहना)- तुम्हारा कभी पैर क्यों नहीं टिकता?

पैर फैलाकर सोना (निश्चिंत रहना)- बेटी का विवाह हो जाए फिर पैर फैला कर सोऊँगा।

पोल खुलना (किसी का छुपा हुआ दोष सामने आ जाना)- जब तुम्हारी पोल खुल जाएगी तब ये ही लोग तुम्हारा क्या हाल करेंगे तुम्हें अनुमान नहीं है।

पोल खोलना (रहस्य प्रकट करना)- आखिर एक दिन पोल खुली कि वह पैसा कहाँ से लाता है।

पैसा खींचना (ठग कर किसी से धन लेना)- उसने उससे पैसे खींच लिए।

पैसा डूबना (हानि होना)- इस कारोबार में मेरा पैसा डूब गया।

पौ फटना (प्रातः काल होना)- पौ फटते ही पिता जी घर से निकल पड़े।

प्रशंसा के पुल बाँधना (बहुत तारीफ करना)- आज तो समारोह में सभाध्यक्ष ने शर्मा जी की प्रशंसा के पुल बाँध दिए।

प्राणों की बाजी लगाना (जान की परवाह न करना)- चिंता मत करो। प्राणों की बाजी लगाकर वह तुम्हारी रक्षा करेगा।

प्राण सूखना (बहुत घबरा जाना)- जंगल में शेर की आवाज सुनते ही हमलोगों के प्राण सूख गए।

प्राण हरना (मार डालना)- शेर ने एक ही झपट्टे में बेचारे हिरण के प्राण हर लिया।

पहलू बचाना- (कतराकर निकल जाना)

पते की कहना- (रहस्य या चुभती हुई काम की बात कहना)

पानी का बुलबुला- (क्षणभंगुर वस्तु)

पानी देना- (तर्पण करना, सींचना)

पानी न माँगना- (तत्काल मर जाना)

पानी पर नींव डालना- (ऐसी वस्तु को आधार बनाना जो टिकाऊ न हो)

पानी पीकर जाति पूछना- (कोई काम कर चुकने के बाद उसके औचित्य का निर्णय करना)

पानी रखना- (मर्यादा की रक्षा करना)

पानी में आग लगाना- (असंभव कार्य करना)

पानी लगना (कहीं का)- (स्थान विशेष के बुरे वातावरण का असर होना )

पानी करना- (सरल कर देना)

पानी फिर जाना- (बर्बाद होना)

पोल खुलना- (रहस्य प्रकट करना)

पुरानी लकीर का फकीर होना/पुरानी लकीर पीटना- (पुरानी चाल मानना)

पैर पकड़ना- (क्षमा चाहना)

फूलना-फलना (धनवान या कुलवान होना)- मेरा आशीर्वाद है; सदा फूलो-फलो।

फटे में पाँव देना (दूसरे की विपत्ति अपने ऊपर लेना)- शर्मा जी की फटे में पाँव देने की आदत है।

फल चखना (कुपरिणाम भुगतना)- वह जैसा कर्म करेगा, वैसा फल चखेगा।

फुलझड़ी छोड़ना (कटाक्ष करना)- गुप्ता जी तो कोई न कोई फुलझड़ी छोड़ते ही रहते हैं।

फूट डालना (मतभेद पैदा करना)- अंग्रेजों ने फूट डाल कर भारत पर राज किया था।

फूला न समाना (अत्यन्त आनन्दित होना)- जब रवि कक्षा 10 में पास हो गया तो वह फूला नहीं समाया।

फूँककर पहाड़ उड़ाना (असंभव कार्य करना)- धीरज फूँककर पहाड़ उड़ाना चाहता है।

फूंक-फूंक कर कदम रखना (सोच-समझकर काम करना)- एक बार नुकसान उठा लिया अब तो फूंक-फूंक कर कदम रखो।

फूटी आँखों न सुहाना (तनिक भी अच्छा न लगना)- झूठ बोलने वाले लोग मुझे फूटी आँख नहीं सुहाते।

फटे हाल होना (बहुत गरीब होना)- जो बेचारा खुद फटे हाल है वह दूसरों की क्या मदद करेगा।

फूँक निकल जाना (भयभीत होना)- बहुत बढ़-चढ़ कर बोल रहा था। जैसे ही प्रधानाचार्य आए उसकी फूँक निकल गई।

फूटी कौड़ी भी न होना (बहुत गरीब होना)- मेरे पास तो फूटी कौड़ी भी नहीं हैं, मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता।

फूट-फूट कर रोना (बहुत रोना)- परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने की खबर सुनकर वह फूट-फूट कर रोने लगी।

फूलकर कुप्पा हो जाना (बहुत खुश होना)- नौकरी लगने की खबर सुनते ही वह फूलकर कुप्पा हो गया।

फक हो जाना (घबड़ा जाना)- ज्योंही मैंने उससे एक हिसाब पूछा कि वह फ़क हो गया।

फंदे में फँसना (जाल में फँसना)- जब तुम किसी बदमाश के फंदे में फँसोगे, तो पता चलेगा।

फंदे में पड़ना (धोखे में पड़ना)- क्या तुम्हारे जैसा चतुर व्यक्ति भी किसी के फंदे में पड़ सकता है ?

फब्तियाँ कसना (व्यंग्य करना)- फब्तियाँ कसने की आदत छोड़ो।

फाख्ता उड़ाना (गुलछर्रे उड़ाना)- दूसरे की कमाई पर फाख्ता उड़ाए जाओ, जब स्वयं कमाने लगोगे तो आटे-दाल का भाव मालूम होगा।

फूल सूँघकर रहना (बहुत थोड़ा खाना)- क्या आप फूल सूँघकर रहते हैं, जो इतना दुर्बल हो गये हैं।

फ़ूलों से तौला जाना (अतीव कोमल होना)- रानी तो फूलों से तौली जाती है।

फफोले फोड़ना- (वैर साधना)

फूल झड़ना- (मधुर बोलना)

बीड़ा उठाना (दायित्व लेना)- गांधजी ने भारत को आजाद करने का बीड़ा उठाया था।

बाजी ले जाना या मारना (जीतना)- देखें, दौड़ में कौन बाजी ले जाता या मारता है।

बेसिर-पैर की बात करना(व्यर्थ की बात करना)- वह तो जब भी देखो, बेसिर-पैर की बात करता है।

बगलें झाँकना (उत्तर न दे सकना)- अध्यापक के सवाल पर राजू बगलें झाँकने लगा।

बगुला भगत (ढोंगी व्यक्ति)- वो साधु तो बगुलाभगत निकला, सबको लूट कर भाग गया।

बाग-बाग होना (बहुत खुश होना)- जब राम अपनी कक्षा में फर्स्ट आया तो उसके माता-पिता का दिल बाग-बाग हो गया।

बोलबाला होना (ख्याति होना)- शहर में सेठ रामचंदानी का बहुत बोलबाला है।

बखिया उधेड़ना (भेद या राज खोलना या पोल खोलना)- आज अजय ने रामू की बखिया उधेड़ दी।

बाँसों उछलना (बहुत खुश होना)- जब बेरोजगार राजू को नौकरी मिल गई तो वह बाँसों उछल रहा था।

बाट जोहना (इन्तजार अथवा प्रतीक्षा करना)- रामू की माँ परदेस गए बेटे की कब से बाट जोह रही है।

बात को गाँठ में बाँधना (स्मरण/याद रखना)- मित्र, मेरी बात को गाँठ में बाँध लो, तुम अवश्य सफल होओगे।

बात खुलना (रहस्य खुलना)- कल सबके सामने रमेश की बात खुल गई।

बात बनाना (झूठ बोलना)- मोहन अब बात बनाना भी सीख गया है।

बुद्धि पर पत्थर पड़ना (अक्ल काम न करना)- आज उसकी बुद्धि पर पत्थर पड़ गए तभी तो उसने 10 लाख का मकान 2 लाख में बेच दिया।

बेपेंदी का लौटा (किसी की तरफ न टिकने वाला)- वह नेता तो बेपेंदी का लौटा है- कभी इस पार्टी में तो कभी उस पार्टी में चला जाता है।

बछिया का ताऊ (मूर्ख व्यक्ति)- धीरू तो बछिया का ताऊ है।

बधिया बैठना (बहुत घाटा होना)- नए रोजगार में तो पवन की बधिया ही बैठ गई।

बहत्तर घाट का पानी पीना (अनेक प्रकार के अनुभव प्राप्त करना)- काका जी बहत्तर घाट का पानी पी चुके हैं, उनको कोई धोखा नहीं दे सकता।

बाएं हाथ का खेल (बहुत सुगम कार्य)- रामू ने कहा कि कबड्डी में जीतना तो उसके बाएं हाथ का खेल है।

बारह बाट करना (तितर-बितर करना)- भाई-भाई की लड़ाई ने राम और श्याम को बारह बाट कर दिया।

बाल की खाल निकालना (छोटी से छोटी बातों पर तर्क करना)- सूरज तो हमेशा बाल की खाल निकालता रहता है।

बाल बाँका न होना (जरा भी हानि न होना)- जिसकी रक्षा ईश्वर करता है उसका बाल भी बाँका नहीं हो सकता।

बुढ़ापे की लाठी (बुढ़ापे का सहारा)- रामदीन का बेटा उसके बुढ़ापे का लाठी था, वह भी विदेश चला गया।

बहती गंगा में हाथ धोना (समय का लाभ उठाना)- हर आदमी बहती गंगा में हाथ धोना चाहता है चाहें उसमें क्षमता हो या न हो।

बगलें झाँकना (उत्तर न दे सकना)- साक्षात्कार के समय प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में वह बगलें झाँकने लगा था।

बट्टा लगाना (कलंकित होना, दाग लगना)- चोरी करके उसने अपने माँ-बाप के नाम पर बट्टा लगा दिया।

बदन में आग लग जाना (बहुत क्रोध आना)- राजेश की झूठी बातें सुनकर मेरे बदन में आग लग गई।

बधिया बैठना (बहुत घाटा होना)- आमदनी कम, खर्चे अधिक।बधिया तो बैठनी ही थी।

बना बनाया खेल बिगड़ जाना (सिद्ध हुआ काम खराब हो जाना)- तुम्हारी एक छोटी-सी गलती से सारा बना बनाया खेल ही बिगड़ गया।

बलि जाना (न्योछावर होना)- मीरा कृष्ण के हर रूप पर बलि जाती थी।

बरस पड़ना (क्रोधित होना)- मुझे देखते ही अध्यापक क्यों इतना बरस पड़े?

बाँछें खिल जाना (बहुत प्रसन्न होना)- बेटे को नौकरी मिलने की खबर सुनते ही शर्मा जी की बाँछें खिल गई।

बाँह चढ़ाना (लड़ने को तैयार होना)- इस तरह से बाँह चढ़ाकर बात करने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। बैठकर शांति से बात करो।

बाँह पकड़ना (शरण में लेना)- किसी बड़े आदमी की बाँह पकड़ लो, बेड़ा पार हो जाएगा।

बाज न आना (बुरी आदत न छोड़ना)- सब लोगों ने इतना समझाया फिर भी वह अपनी आदतों से बाज नहीं आता।

बात का बतंगड़ बनाना (छोटी-सी बात को बहुत बढ़ा देना)- बात का बतंगड़ मत बनाओ और इस किस्से को यहीं समाप्त करो।

बात न पूछना (परवाह न करना)- जब उसका अपना बेटा ही बात नहीं पूछता तो दूसरा कोई क्या मदद करेगा?

बात बढ़ना (झगड़ा होना)- बात ही बात में इतनी बात बढ़ गई कि दोनों ओर से चाकू-छुरियाँ निकल आयीं।

बाल-बाल बचना (मुश्किल से बचना)- विमान दुर्घटना में सभी यात्री बाल-बाल बच गए।

बात का धनी होना (वायदे का पक्का होना)- वह अपनी बात का धनी है। यदि उसने आने का वायदा किया है तो अवश्य आएगा।

बेड़ा गर्क करना (नष्ट करना)- तुमने मेरा बेड़ा गर्क कर दिया है। अब मैं तुम्हारे साथ काम नहीं कर सकता।

बे पर की उड़ाना (निराधार बातें करना)- मेरे सामने बे पर की मत उड़ाया करो। वही बातें किया करो जिनका कोई प्रमाण हो।

बुरा फँसना (झंझट में पड़ना)- मैं इस खराब रास्ते में गाड़ी लाकर बुरा फँसा।

बुरा मानना (नाराज होना)- बूढ़े की बातों का बुरा न मानना चाहिए।

बेवक्त की शहनाई बजाना (अवसर के प्रतिकूल कार्य करना)- पूजा के अवसर पर सिनेमा के गीत सुना कर लोग बेवक्त की शहनाई बजाते हैं।

बोलती बंद करना (भय से आवाज न निकलना)- मैंने उसे ऐसी डाँट बताई कि उसकी बोलती बंद हो गयी।

बन्दरघुड़की देना- (धमकाना)

बाजार गर्म होना- (सरगर्मी होना, तेजी होना)

बात का धनी- (वादे का पक्का, दृढप्रतिज्ञ)

बात की बात में- (अतिशीघ्र)

बात चलाना- (चर्चा करना)

बात पर न जाना- (विश्वास न करना)

बात रहना- (वचन पूरा करना)

बातों में उड़ाना- (हँसी-मजाक में उड़ा देना)

बात पी जाना- (बर्दाश्त करना, सुनकर भी ध्यान न देना)

बाल की खाल निकालना- (छिद्रान्वेषण करना)

बालू की भीत- (शीघ्र नष्ट होनेवाली चीज)

भीगी बिल्ली होना (डर से दबना)- वह अपने शिक्षक के सामने भीगी बिल्ली हो जाता है।

भानमती का कुनबा जोड़ना (अलग-अलग तरह की चीजें जोड़ना या इकट्ठा करना)- राजू ने अपने ऑफिस में भानमती का कुनबा जोड़ा हुआ है, उसमें सभी तरह के लोग हैं।

भंडा फूटना (पोल खुलना)- भंडा फूटने के डर से रवि मीटिंग से उठ कर चला गया।

भंडा फोड़ना (पोल खोलना)- जरा-सी कहासुनी पर महेश ने रवि का भंडा फोड़ दिया।

भगवान को प्यारे हो जाना (मर जाना)- सोनू के नानाजी कल भगवान को प्यारे हो गए।

भरी थाली में लात मारना (लगी लगाई नौकरी छोड़ना)- राजू ने भरी थाली में लात मारकर अच्छा नहीं किया।

भांजी मारना (किसी के बनते काम को बिगाड़ना)- रामू के विवाह में उसके ताऊ ने भांजी मार दी।

भेड़ की खाल में भेड़िया (देखने में सरल तथा भोलाभाला, पर वास्तव में खतरनाक)- कालू तो भेड़ की खाल में भेड़िया है।

भैंस के आगे बीन बजाना (वज्र मूर्ख के सामने बुद्धिमानी की बातें करना)- राजू को कोई बात समझाना तो भैंस के आगे बीन बजाना है।

भौंहे टेढ़ी करना (क्रोध आना)- पिताजी की जरा भौंहे टेढ़ी करते ही पिंटू चुप हो गया।

भनक पड़ना (सुनाई पड़ना)- पुजारी जी ने अपनी लड़की की शादी कर दी और किसी को भनक तक नहीं पड़ी।

भाड़ झोंकना (व्यर्थ समय नष्ट करना)- अगर पढ़ाई-लिखाई नहीं करोगे तो सारी जिंदगी भाड़ झोंकोगे।

भाड़े का टट्टू (किराए का आदमी)- इस तरह के काम भाड़े के टट्टुओं से नहीं होते। खुद मेहनत करनी पड़ती है।

भूत चढ़ना या सवार होना (किसी काम में पूरी तरह लग जाना)- उस पर आजकल परीक्षा का भूत सवार है। दिन रात पढ़ने में ही लगी रहती है।

भूत उतरना (क्रोध शांत होना)- उससे कुछ मत कहो। जब भूत उतर जाएगा तब खुद ही शांत हो जाएगा।

भूत बनकर लगना (जी-जान से लगना)- वह तो मेरे पीछे भूत बनकर लग गया है, छोड़ने का नाम ही नहीं लेता।

भृकुटि तन जाना (क्रोध आना)- मेरी बात सुनते ही अध्यापक महोदय की भृकुटि तन गई।

भोग लगाना (देवता/ईश्वर को नैवेद्य चढ़ाना)- मैं पहले ठाकुरजी को भोग लगाऊँगा तब नाश्ता करूँगा।

भभूत रमाना (साधु हो जाना)- बेचारे की पत्नी मरी, तो उसने भभूत रमा लिया।

भर नजर देखना (अच्छी तरह देखना)- आओ, तुझे भर नजर देख लूँ, पता नहीं फिर कब मुलाकात होती है ?

भँवरा बना फिरना (रस-लोलुप होना)- इन दिनों कुमार भँवरा बना फिरता है।

भाग्य खुलना (भाग्य चमकना)- देखें, हमारा भाग्य कब खुलता है ?

भाग्य फूटना (किस्मत बिगड़ना)- भाग्य फूट गया जो तुमसे संबंध किया।

भुजा उठा कर कहना (प्रतिज्ञा करना)- ”निशिचरहीन करौं महीं, भुज उठाइ पन कीन्ह”।

भूँजी भाँग न होना (अत्यंत दरिद्र होना)- घर भूँजी भाँग नहीं और दरवाजे पर तमाशा करा रहे हैं।

भेड़ियाधसान होना- (देखा-देखी करना)

भारी लगना- (असहय होना)

मुँह धो रखना (आशा न रखना)- यह चीज अब मिलने को नही मुँह धो रखिए।

मुँह में पानी आना (लालच होना)- मिठाई देखते ही उसके मुँह में पानी भर आया।

मैदान मारना (बाजी जीतना)- पानीपत की लड़ाई में आखिर अब्दाली ही मैदान मारा।

मैदान साफ होना (कोई रुकावट न होना)- जब रात को सब लोग सो गए और पुलिस वाले भी चले गए तो चोरों को लगा कि अब मैदान साफ है और सामने वाले घर में घुसा जा सकता है।

मिट्टी के मोल बिकना (बहुत सस्ता)- जो चीज मिट्टी के मोल थी आज की मँहगाई में सोने के भाव बिक रही है।

मुट्ठी गरम करना (घूस देना)- मुट्ठी गर्म करने के बाद ही क्लर्क बाबू ने मेरा काम किया।

मुँह बंद कर देना (शांत कराना)- तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो

मीठी छुरी (छली-कपटी मनुष्य)- वह तो मीठी छुरी है, मैं उसकी बातों में नहीं आती।

मुँह अँधेरे (बहुत सवेरे)- वह नौकरी के लिए मुँह अँधेरे निकल जाता है।

मुँह काला होना (अपमानित होना)- उसका मुँह काला हो गया, अब वह किसी को क्या मुँह दिखाएगा।

मुँह की खाना (हारना/पराजित होना)- इस बार तो राजू पहलवान ने मुँह की खाई है, पिछली बार वह जीता था।

मक्खन लगाना (चापलूसी करना)- चपरासी को मक्खन लगाने के बाद भी रामू का काम नहीं बना।

मक्खी मारना (बेकार रहना)- पढ़-लिख कर श्यामदत्त मक्खी मार रहा है।

मगजपच्ची करना (समझाने के लिए बहुत बकना)- इस काठ के उल्लू के साथ कौन मगजपच्ची करे।

मगरमच्छ के आँसू (दिखावटी सहानुभूति प्रकट करना)- राम के फेल होने पर उसके साथी मगरमच्छ के आँसू बहाने लगे।

मरने को भी छुट्टी न होना (अत्यधिक व्यस्त रहना)- आचार्य जी के पास तो मरने की भी छुट्टी नहीं होती।

मरम्मत करना (मारना-पीटना)- माँ ने सुबह-सुबह टीटू की मरम्मत कर दी।

मस्तक ऊँचा करना (प्रतिष्ठा बढ़ाना)- डॉक्टरी पास करके रवि ने अपने माँ-बाप का मस्तक ऊँचा कर दिया।

महाभारत मचाना (खूब लड़ाई-झगड़ा करना)- सोनू और मोनू दोनों बहन-भाई सुबह से महाभारत मचा रहे हैं।

मांग उजाड़ना (विधवा होना)- युवावस्था में ही सीमा की मांग उजड़ गई।

मिजाज आसमान पर होना (बहुत घमंड होना)- नई कार खरीदने के बाद शंभू का मिजाज आसमान पर हो गया है।

मिट्टी डालना (किसी के दोष को छिपाना)- बच्चों की गलतियों पर मिट्टी नहीं डालनी चाहिए।

मुँह पर कालिख लगना (कलंकित होना)- चोरी करते पकड़े जाने पर राजू के मुँह पर कालिख लग गई।

मुँह पर ताला लगना (चुप रहने के लिए विवश होना)- कक्षा में अध्यापक के आने पर सब छात्रों के मुँह पर ताला लग जाता है।

मुँह पर थूकना (बुरा-भला कहना)- कालू की करतूत देखकर सब उसके मुँह पर थूक गए।

मुँह फुलाना (अप्रसन्नता या असंतुष्ट होकर रूठ कर बैठना)- शांति सुबह से ही अपना मुँह फुलाए घूम रही है।

मुँह सिलना (चुप रहना)- मैंने तो अपना मुँह सिल लिया है। तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारे विरुद्ध कुछ नहीं बोलूँगा।

मुँह काला करना (कलंकित होना)- दुश्चरित्र महिलाएँ न जाने कहाँ-कहाँ मुँह काला कराती फिरती है।

मुँह चुराना (सम्मुख न आना)- इस तरह समाज में कब तक मुँह चुराते फिरोगे। जाकर प्रधान जी से अपनी गलती की माफी माँग लो।

मुँह जूठा करना (थोड़ा-सा खाना/चखना)- यदि भूख नहीं है तो कोई बात नहीं। थोड़ा-सा मुँह जूठा कर लीजिए।

मुँहतोड़ जबाब देना (ऐसा उत्तर देना कि दूसरा कुछ बोल ही न सके)- मैंने ऐसा मुँहतोड़ जबाब दिया कि सबकी बोलती बंद हो गई।

मुँह निकल आना (कमजोरी के कारण चेहरा उतर जाना)- एक सप्ताह की बीमारी में ही उसका मुँह निकल आया है।

मुँह की बात छीन लेना (दूसरे के मन की बात कह देना)- आपने यह बात कहकर तो मेरे मुँह की बात छीन ली। मैं भी यही बात कहना चाहता था।

मुँह में खून लगना (अनुचित लाभ की आदत पड़ना)- इस थानेदार के मुँह में खून लग गया है। बेचारे गरीब सब्जी वालों से भी हफ़्ता-वसूली करता है।

मुँह मोड़ना (उपेक्षा करना)- जब ईश्वर ही मुँह मोड़ लेता है तब दुनिया में कोई सहारा नहीं बचता।

मुँह लगाना (बहुत स्वतंत्रता देना)- ऐसे घटिया लोगों को मैं मुँह नहीं लगाता।

मूँछ उखाड़ना (गर्व नष्ट करना)- सत्तो पहलवान की आज तक कोई मूँछ नहीं उखाड़ पाया है।

मूँछ नीची होना (लज्जित होना)- जब नौकर ने टका-सा जवाब दे दिया तो ठाकुर साहब की मूँछ नीची हो गई।

मूँछों पर ताव देना (वीरता की अकड़ दिखाना)- ज्यादा मूँछों पर ताव मत दो, बजरंग आ गया तो सारी हेकड़ी निकल जाएगी।

मूँछ मुड़वाना (हार मान लेना)- यदि मेरी बात झूठी निकली तो मैं मूँछ मुड़वा लूँगा।

मूली-गाजर समझना (अति तुच्छ समझना)- आतंकवादी आम जनता को मूली-गाजर समझते हैं।

मैदान छोड़ना (युद्धक्षेत्र से भाग जाना)- मैदान छोड़ कर भागने वाला कायर होता है।

म्यान से बाहर होना (अत्यन्त क्रुद्ध होना)- अशोक जरा-सी बात पर म्यान से बाहर हो गया।

मन उड़ा-उड़ा सा रहना (मन स्थिर न रहना)-पति के आने के इंतजार में मधु का मन आजकल उड़ा-उड़ा सा रहता है।

मन डोलना (इच्छा होना/ललचाना)- मेले में मिठाइयों की दुकान से गुजरते समय केशव का मन डोलने लगा।

मजा किरकिरा होना (आनंद में विघ्न पड़ना)- बार-बार बिजली आती-जाती रही इसलिए फ़िल्म का सारा मजा किरकिरा हो गया।

मजा चखाना (गलती की सजा देना)- जो कुछ तुमने किया है उसका तुम्हें मजा चखाकर रहूँगा।

मन कच्चा होना/करना (हिम्मत हारना/छोड़ना)- इतनी कोशिश के बाद भी नौकरी नहीं मिली इसलिए मेरा तो मन कच्चा हो गया है।

मन की मन में रह जाना (इच्छा पूरी न होना)- बेटी के विवाह में लड़के वालों से अनबन हो गई इसलिए कुछ भी ठीक से न हो पाया।

मन बढ़ना (हौसला बढ़ना)- हमारे गेम्स-टीचर हमेशा हमलोगों का मन बढ़ाते रहते हैं इसलिए हमारे स्कूल की टीम हर मैच जीतती है।

मन मार कर रह जाना (अधिक वेदना होना)- मेरे बेटे की जगह जब एक मंत्री के बेटे को नौकरी मिल गई तो मैं मन मार कर रह गया।

मन मसोस कर रह जाना (मन के भावों को मन में ही दबा देना)- जब उन लोगों की बातें सरकार ने नहीं मानी तो बेचारे मन मसोस कर रह गए।

मन में बसना (प्रिय लगना)- जब कोई मन में बस जाता है तब उसकी कमियाँ दिखाई नहीं देतीं।

मन में चोर होना (मन में धोखा-फरेब होना)- जिसके मन में चोर होता है वही ऐसी अविश्वसनीय बातें करता है।

मन रखना (इच्छा पूरी करना)- मैंने उसका मन रखने के लिए ही झूठ बोला था।

मस्ती मारना (मौज उड़ाना)- पिकनिक में सब लोग मस्ती मार रहे हैं।

मिट्टी का माधो (मूर्ख)- सुबोध तो एकदम मिट्टी का माधो है, उससे कुछ भी उम्मीद मत कीजिए।

मिट्टी में मिलाना (नष्ट करना)- यदि उसने मेरे साथ गद्दारी की तो मैं उसे मिट्टी में मिला दूँगा।

मिट्टी पलीद करना (दुर्गति करना)- भाषण प्रतियोगिता में सुशील ने सभी वक्ताओं की मिट्टी पलीद कर दी।

माथा ठनकना (खटका पैदा होना, आशंका होना)- उसकी बहकी-बहकी बातें सुनकर मेरा तो माथा तभी ठनका था और मैंने तुमलोगों को आगाह भी किया था पर तुमलोगों ने मेरी सुनी ही नहीं।

माथा-पच्ची करना (सिर खपाना)- हमलोग सुबह से माथा-पच्ची कर रहे हैं पर इस सवाल को हल नहीं कर पाए हैं।

माथा फिरना (दिमाग खराब होना)- तुम चले जाओ यहाँ से। अगर मेरा माथा फिर गया तो तुम्हारी खैर नहीं।

मार-मार कर चमड़ी उधेड़ देना (बहुत पीटना)- पुलिस वाले ने उस चोर को मार-मार कर उसकी चमड़ी उधेड़ दी।

मारा-मारा फिरना (इधर-उधर ठोकरें खाते फिरना)- आजकल वह नौकरी की तलाश में चारों ओर मारा-मारा फिर रहा है।

माला फेरना (माला के दानों को गिनकर जप करना)- केवल माला फेरने से ईश्वर नहीं मिलते, मन से भक्ति करनी पड़ती है तब ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

मिट्टी खराब करना (दुर्दशा करना)- रमानाथ से झगड़ा मत करना। वह तुम्हारी मिट्टी खराब कर देगा।

मिलीभगत होना (गुप्त सहमति होना)- पुलिसवालों की मिलीभगत थी, इसलिए चोर जेल से गायब हो गए।

मुट्ठी में होना (वश में होना)- चिंता क्यों करते हो? जब मंत्री जी मेरी मुट्ठी में हैं तो हमारा काम कैसे नहीं बनेगा?

मुराद पूरी होना (मनोकामना पूरी होना)- करीम का बेटा जब डॉक्टर बन गया तो उसकी मुराद पूरी हो गई।

मेल खाना (संगति के अनुकूल होना)- वह लड़की सबसे अलग है। उसके विचार किसी से मेल नहीं खाते।

मोटे तौर पर (साधारणतः)- इस बात के बारे में मैंने तो आपको मोटे तौर पर समझाया है। यदि आपको विस्तृत जानकारी चाहिए तो हमारे डायरेक्टर से मिलिए।

मोर्चा मारना (विजय हासिल करना)- तीन दिन तक घमासान युद्ध हुआ और चौथे दिन हमारी सेना ने मोर्चा मार लिया तथा पाकिस्तानी चौकी पर भारत का झंडा फहरा दिया।

मोर्चा लेना (युद्ध करना)- जब तक हमारी सेना दुश्मन की सेना के साथ मोर्चा नहीं लेगी तब तक ये लोग इसी तरह की आतंकवादी गतिविधियाँ करते रहेंगे।

मोल-भाव करना (कीमत घटा-बढ़ा कर सौदा करना)- पिता जी ने समझाया था कि जब भी कुछ खरीदो मोल-भाव अवश्य कर लो।

मौका हाथ आना (अवसर आना)- जब मौका हाथ आएगा, मैं अवश्य काम पूरा करूँगा।

मौत के मुँह में जाना (जान जोखिम में डालना)- राजकुमारी को बचाने के लिए राजकुमार को मौत के मुँह में जाना पड़ा।

मौत बुलाना (खतरनाक कार्य करना)- मोटर साइकिल को तेज चलाना मौत बुलाना है।

मर मिटना (कुर्बान हो जाना)- हम तुम्हारे लिए मर मिटेंगे पर उफ-आह भी न कहेंगे।

मुठभेड़ होना (सामना होना)- हुमायूँ और शेरशाह में चौसा के निकट मुठभेड़ हो गयी।

मुफ़्त की रोटियाँ तोड़ना (बिना काम किये दूसरों का अन्न खाना)- मेरा कुछ काम भी तो करो, कब तक मुफ़्त की रोटियाँ तोड़ते रहोगे ?

मोम हो जाना (कोमल होना)- विपत्ति आने पर कठोर आदमी भी मोम हो जाता है।

मांस नोचना- (तंग करना)

मन फट जाना- (विराग होना, फीका पड़ना)

मन के लड्डू खाना- (व्यर्थ की आशा पर प्रसन्न होना)

मैदान साफ होना- (मार्ग में बाधा न होना)

मीन-मेख करना- (व्यर्थ तर्क)

मन खट्टा होना- (मन फिर जाना)

मोटा आसामी- (मालदार आदमी)

यमपुर पहुँचाना (मार डालना)- पुलिस ने चोर को मारमार कर यमपुर पहुँचा दिया।

युक्ति लड़ाना (उपाय करना)- अशोक हमेशा पैसा कमाने की युक्ति लड़ाता रहता।

यश गाना (प्रशंसा करना)- यदि आप देश के लिए अच्छे काम करेंगे तो लोग आपका यश गाएँगे।

यारी गाँठना (मित्रता करना)- पुलिस वालों से यारी गाँठना उसे महँगा पड़ा।

यश मिलना (सम्मान मिलना)- देखें, इस चुनाव में किसे यश मिलता है ?

यश मानना- (कृतज्ञ होना)

युग-युग- (बहुत दिनों तक)

युगधर्म- (समय के अनुसार चाल या व्यवहार)

युगांतर उपस्थित करना- (किसी पुरानी प्रथा को हटाकर उसके स्थान पर नई प्रथा चलाना)

रंग जमना (धाक जमना)- तुम्हारा तो कल खूब रंग जमा।

रंग बदलना (परिवर्तन होना)- जमाने का रंग बदल गया है।

रंग में भंग पड़ना (बिघ्न या बाधा पड़ना)- मीरा की शादी में कुछ असामाजिक तत्वों के आने से रंग में भंग पड़ गया।

रंग उड़ना या रंग उतरना (फीका होना)- सजा सुनते ही अपराधी के चेहरे का रंग उतर गया।

रंग चढ़ना (प्रभावित होना)- रामू पर दिल्ली के रहन-सहन का रंग चढ़ गया है। अब तो वह कान में मोबाइल लगाए फिरता है।

रंग जमाना (रौब जमाना)- नया मैनेजर सब पर अपना रंग जमा रहा है।

रंग में ढलना (किसी के प्रभाव में आना)- मनोज आवारा लड़कों के साथ रहकर उन्हीं के रंग में ढल गया है।

रंग में भंग करना (आनन्द और हंसी-ख़ुशी में विघ्न डालना)- शादी में लड़ाई करके रवि ने रंग में भंग कर दिया।

रंग उड़ना (रौनक समाप्त हो जाना)- शर्मा जी को देखते ही मदन के चेहरे का रंग उड़ गया।

रंग लाना (प्रभाव दिखाना)- ‘मेहनत हमेशा रंग लाती है, इस बात को मत भूलो।’

रँगा सियार (धोखेबाज आदमी)- मैं सुमन पर विश्वास करता था पर वह तो रँगा सियार निकला, मेरा सारा पैसा लेकर भाग गया।

रफू चक्कर होना (गायब होना)- अभी तो वह लड़का यहीं बैठा था। आपको आते देख लिया होगा इसलिए लगता है कहीं रफू चक्कर हो गया।

राई से पर्वत करना या बनाना (छोटे से बड़ा होना)- शांति किसी भी बात को राई से पर्वत कर देती है।

राई का पर्वत होना (बात का बतंगड़ होना)- मुझे क्या पता कि मेरे बोलने से राई का पर्वत हो जाएगा, वर्ना मैं चुप ही रहता।

राई-काई करना (छिन्न-भिन्न करना)- पुलिस ने जरा-सी देर में सारी भीड़ को राई-काई कर दिया।

रंगे हाथों पकड़ना (अपराध करते हुए पकड़ना)- पुलिस ने चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया।

रास्ते का काँटा (उन्नति या प्रगति में बाधक)- मोहन की कड़वी जुबान उसके रास्ते का काँटा हैं।

राह में रोड़ा पड़ना (काम में बाधा आना)- राह में तमाम रोड़े पड़ने पर साहसी लोग कभी नहीं रुकते।

रात-दिन एक करना (निरन्तर कठिन परिश्रम करना)- परीक्षा में पास होने के लिए सुरेश ने रात-दिन एक कर दी।

राम नाम सत्त हो जाना (मर जाना)- कल राजू के परदादा की राम नाम सत्त हो गई।

रामराम होना (मुलाकात होना)- सुबह-सुबह टहलने जाते समय सबसे रामराम हो जाती है।

रास्ता देखना (इन्तजार करना)- हमलोग कल आपका रास्ता देखते रहे पर न तो आप आए और न ही कोई सूचना दी।

रास्ते पर लाना (सुधारना)- महात्माजी ने अनेक पथ भ्रष्ट लोगों को रास्ते पर ला दिया है।

रुपया पानी में फेंकना (रुपया व्यर्थ खर्च करना)- खटारा कार खरीद कर राम ने रुपया पानी में फ़ेंक दिया है।

रोटी चलाना (भरण-पोषण करना)- रवि मजदूरी करके अपनी रोटी चला रहा है।

रोशनी डालना (स्पष्ट करना)- अभी आपने जो कुछ कहा था उस पर फिर से रोशनी डालिए, मैं आपकी बात समझ नहीं पाया।

रट लगाना (बार-बार एक ही बात करना)- रमा का बेटा बहुत जिद्दी है। हर चीज की रट लगाए रहता है और माँ-बाप को वह चीज दिलानी पड़ती है।

रत्ती भर (जरा-सा)- मैं उसकी बातों पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं करता।

रफा-दफा करना (फैसला करना)- अच्छा हुआ आपने मामले को रफा-दफा कर दिया वरना खून-खच्चर हो जाता।

रहम खाना (दया करना)- उस बेचारी विधवा पर रहम खाओ और उसका कर्जा माफ कर दो।

राग अलापना (अपनी कहते जाना, दूसरे की न सुनना)- रोहन जी अपना ही राग अलापते रहते हैं किसी दूसरे की सुनते ही नहीं हैं।

रामबाण औषधि (अचूक दवा)- प्राणायाम ही समस्त रोगों की रामबाण औषध है।

रास आना (अनुकूल होना)- मुझे यह शहर रास आ गया है। अब मैं रिटायरमेंट तक यहीं रहूँगा।

रास्ता नापना (चले जाना)- तुम अपना रास्ता नापो। यहाँ तुम्हारी दाल नहीं गलेगी।

रुपया उड़ाना (धन व्यर्थ में खर्च करना)- पिता जी लाखों रुपए छोड़े थे पर राकेश ने शराब और जुए में सारा रुपया उड़ा दिया।

रुपया ऐंठना (चालाकी से धन ले लेना)- ट्रेन में जो लोग सामान बेचने आते हैं उनसे कभी कुछ मत खरीदना। घटिया सामान दिखाकर रुपये ऐंठ ले जाते हैं।

रुपया बरसना (खूब धन प्राप्त होना)- भगवान की कृपा से सेठ जी के धंधे में रुपया बरस रहा है।

रूह काँपना (बहुत डरना)- अँधेरे में श्मशान पर जाने की बात सोचकर ही मेरी तो रूह काँपने लगती है।

रोंगटे खड़े होना (भय, शोक, हर्ष आदि के कारण रोमांचित होना)- रात को डर के मारे मेरी पत्नी के रोंगटे खड़े हो गए।

रोजी चलना (जीविका का निर्वाह होना)- इस महँगाई में रोजी चलना भी दूभर हो गया है।

रोटियाँ तोड़ना (किसी के यहाँ उसकी कृपा पर जीवन वसर करना)- कब तक ससुराल में मुफ़्त की रोटियाँ तोड़ते रहोगे? जाकर कहीं काम-धंधे की तलाश क्यों नहीं करते?

रोड़ा अटकना/अटकाना (विघ्न पड़ना/डालना)- मेरा काम बनने ही वाला था कि उस क्लर्क ने रिश्वत के लालच में रोड़ा अटका दिया।

रोब में आना (दूसरे के प्रभाव में आना)- जाकर किसी और को धमकाना, यहाँ तुम्हारे रोब में कोई आनेवाला नहीं।

रक्त चूसना (संपत्ति हरण करना)- उसने उसके साथ रहकर उसका रक्त चूस लिया।

रक्तपात मचाना (मार-काट करना)- महाभारत-युद्ध में बड़ा ही रक्तपात मचा।

रस लेना (आनंद लेना)- वे इन दिनों कवि-गोष्ठियों में रस नहीं लेते।

रस्सी ढीली छोड़ना (ढील देना)- जब से उसने रस्सी ढीली छोड़ दी, तब से उसका लड़का बिगड़ गया।

राग-रंग में रहना (ऐश में रहना)- इन दिनों राजनीतिज्ञ ही राग-रंग में रहते हैं।

रूई की तरह धुन डालना (खूब पीटना)- अगर बदमाशी करोगे तो रूई की तरह धुन दिये जाओगे।

रेल-पेल होना (भीड़-भड़क्का होना)- जहाँ रेल-पेल हो, वहाँ मैं जाता नहीं।

रौनक जाती रहना (कांति समाप्त हो जाना)- बीमारी के कारण उसके चेहरे की रौनक जाती रही।

रसातल को पहुँचना (बर्बाद करना)- यदि मुझसे भिड़ोगे, तो रसातल को पहुँचा दूँगा।

रीढ़ टूटना- (आधार समाप्त होना)

रोना रोना- (दुखड़ा सुनाना)

लोहे के चने चबाना ( कठिनाई झेलना)- भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना को लोहे के चने चबाने पड़े।

लकीर का फकीर होना (पुरानी प्रथा पर ही चलना)- ये अबतक लकीर के फकीर ही है। टेबुल पर नही, चौके में ही खायेंगे।

लोहा मानना (किसी के प्रभुत्व को स्वीकार करना)- क्रिकेट के क्षेत्र में आज सारे देशों की टीमें आस्ट्रेलिया की टीम का लोहा मानती हैं।

लेने के देने पड़ना (लाभ के बदले हानि)- नया काम हैं। सोच-समझकर आगे बढ़ना। कहीं लेने के देने न पड़ जायें।

लँगोटी पर (में) फाग खेलना- (अल्पसाधन होते हुए भी विलासी होना)

लँगोटिया यार (बचपन का दोस्त)- अभिषेक मेरा लँगोटिया यार है।

लल्लो-चप्पो करना (खुशामद करना, चिरौरी करना)- विनोद ल्लो-चप्पो करके अपना काम चलाता है।

लाल-पीला होना (नाराज होना)- राजू के कक्षा में शोर मचाने पर अध्यापक लाल-पीले हो गए।

लुटिया डूबना (काम चौपट हो जाना)- रामू ने नया कारोबार किया था, उसकी लुटिया डूब गई।

लंबी-चौड़ी हाँकना (गप्प मारना)- मोहन कक्षा में लंबी-चौड़ी हाँक रहा था तभी अध्यापक आ गए और वह खामोश हो गया।

लकीर पीटना (बिना सोचे-समझे पुरानी प्रथा पर चलना)- कब तक यूँ ही लकीर पीटती रहोगी? जमाने के साथ अपने को बदलना सीखो।

लगाम कड़ी करना (सख्ती से नियंत्रण करना/सख्ती करना)- प्रधानाचार्य ने लगाम कड़ी की तो सभी समय पर आने लगे।

लगाम ढीली करना (सख्ती न करना/नियमों में नर्मी बरतना)- जरा-सी लगाम ढीली करने से मेरी कंपनी का कोई भी कर्मचारी अब समय पर नहीं आता।

लज्जा या शर्म से पानी-पानी होना (बहुत लज्जित होना)- अपनी गलती पर पंडित जी लज्जा से पानी-पानी हो गए।

लौ लगना (धुन लगना, प्रेम होना)- मधुरिमा को तो पढ़ाई की लौ लग गई है। दिन रात पढ़ने में ही लगी रहती है।

लंका कांड होना (लड़ाई-झगड़ा होना)- आज सीमा का अपने पड़ोसी से लंका कांड हो गया।

लंबे हाथ मारना (खूब धन प्राप्त करना)- शंकर आजकल लंबे हाथ मार रहा हैं।

लकड़ी होना (अत्यन्त दुर्बल होना)- बीमारी में बिट्टू लकड़ी हो गया है।

लाख टके की बात (अत्यंत उपयोगी और सारगर्भित बात)- आचार्य जी हमेशा लाख टके की बात कहते हैं।

लोट-पोट कर देना (बहुत हँसाना)- दादा कोंडके की फिल्में हमें लोट-पोट कर देती हैं।

लोहा लेना (सामना करना)- 1857 के संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लोहा लिया।

लंका ढहाना (किसी संपन्न देश/परिवार का सत्यानाश कर देना)- अपने चाचा को समझाओ वे क्यों विभीषण की तरह अपने परिवार की लंका ढहाने पर लगे हुए हैं।

लहू का घूँट पीकर रह जाना (विवशतावश क्रोध को पीकर रह जाना)- गलती न करने पर भी जब उस दरोगा ने जेल में बंद करने की धमकी दी तो मैं लहू का घूँट पीकर रह गया।

लगन लगना (प्रेम/भक्ति होना)- ईश्वर में जब लगन लग जाती है तो सारा संसार मिथ्या लगने लगता है।

लच्छेदार बातें करना (मजेदार बातें करना)- उसकी बातों में मत आ जाना। वह हमेशा लच्छेदार बातें करती है और लोगों को फँसा लेती है।

लट्टू होना (आसक्त होना, फिदा होना)- मदन की मतिभ्रष्ट हो गई है। कितनी घटिया लड़की पर लट्टू हो गया है।

लाले पड़ना (किसी चीज को देखने या पाने के लिए तरसना)- पिता जी के देहांत के बाद आमदनी के सारे रास्ते बंद हो गए और घर में खाने के भी लाले पड़ गए।

लुटिया डुबोना (काम चौपट करना)- अरे भाई, उस लड़के का साथ छोड़ दो वरना तुम्हारी भी लुटिया डुबो देगा।

लानत भेजना (धिक्कारना)- मैं तुम्हें लानत भेजता हूँ। निकल जाओ यहाँ से और फिर कभी अपना मनहूस चेहरा मत दिखाना।

लेने के देने पड़ना (लाभ के स्थान पर हानि होना)- शेयरों में इतना पैसा मत लगाओ। कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ।

लीप-पोतकर बराबर करना (सर्वस्व बर्बाद कर देना)- जब से वह कंपनी का मैनेजर हुआ, उसने कंपनी का सारा हिसाब लीप-पोतकर बराबर कर दिया।

लाख से लाख होना- (कुछ न रह जाना)

लोहा बजना- (युद्ध होना)

लहू होना- (मुग्ध होना)

लग्गी से घास डालना- (दूसरों पर टालना)

वक्त पड़ना (मुसीबत आना)- वक्त पड़ने पर ही मित्र की पहचान होती है।

वज्र टूटना (भारी विपत्ति आना)- रामू के पिताजी के मरने के पश्चात् उस पर वज्र टूट पड़ा।

विष घोलना (किसी के मन में शक या ईर्ष्या पैदा करना)- राजू ने बनी-बनाई बात में विष घोल दिया।

विष उगलना (कड़वी बात कहना)- कालू हमेशा राजू के खिलाफ विष उगलता रहता है।

वेद वाक्य (सौ प्रतिशत सत्य)- हमारे शिक्षक की कही हर बात वेद वाक्य है।

वचन से फिरना (प्रतिज्ञा पूरी न करना)- तुमने जैसा कहा है मैं वैसा कर दूँगा लेकिन अपने वचन से फिरना मत।

वारा-न्यारा करना (निपटारा करना, खतम करना)- जब मेरा काम चलने लगेगा तो ऐसे कई लोगों का तो मैं वारा-न्यारा कर दूँगा।

वाहवाही लूटना (प्रशंसा पाना)- काम कोई करना नहीं चाहता। सिर्फ बिना कुछ करे-धरे वाहवाही लूटना चाहते हैं।

वीरगति को प्राप्त होना (मर जाना)- राणा प्रताप ने मुगल सेना का डट कर सामना किया और अंत में वीरगति को प्राप्त हुए।

वक़्त पर काम आना (विपत्ति में मदद करना)- सच्चे दोस्त ही वक्त पर काम आते हैं।

वार खाली जाना (चाल सफल न होना)- इस बार तो वार खाली गया, आगे क्या होता है ?

वचन हारना- (जबान हारना)

वचन देना- (जबान देना)

शैेतान की खाला (बहुत ही दुष्ट स्त्री)- शांति तो शैेतान की खाला है।

शंख के शंख रहना (मूर्ख के मूर्ख बने रहना)- शंभू तो शंख का शंख ही रहा।

शक़्कर से मुँह भरना (खुशखबरी सुनाने वाले को मिठाई खिलाना)- रमेश ने दसवीं पास होने पर अपने मित्रों का शक़्कर से मुँह भर दिया।

शह देना (उत्साह बढ़ाना)- तुम शह न देते तो उनकी मजाल थी कि मुझे यूँ आँखें दिखाती।

शहद लगा कर चाटना (निरर्थक वस्तु को संभाल कर रखना)- मेरा काम हो गया, अब तुम इस फाइल को शहद लगा कर चाटो।

शेर होना (निर्भय और घृष्ट होना)- अपनी गली में तो कुत्ते भी शेर होते है।

शैेतान का बच्चा (बहुत नीच और दुष्ट आदमी)- वह वकील तो शैेतान का बच्चा है।

शेखी बघारना/मारना (अपनी झूठी प्रशंसा करना)- वह हमेशा अपनी शेखी ही बघारती रहती है और खुशामदी लोग उसकी हाँ में हाँ मिलाते रहते हैं।

शकुन देखना/विचारना (शुभ-अशुभ का विचार करना)- शकुन देखकर विवाह की तारीख तय कर लीजिए।

शरीर टूटना (शरीर में दर्द होना)- आज सुबह से ही मेरा शरीर टूट रहा है और जी मचला रहा है।

शह देना (उकसाना)- तुमने शह न दी होती तो आज वह मुझे गाली देकर न जाता।

शहद लगाकर चाटना (निरर्थक वस्तुओं को सँभाल कर रखना)- अब इन दस्तावेजों को वापस क्यों नहीं कर देते? क्या शहद लगाकर इनको चाटोगे?

शामत आना (बुरा समय आना)- सब ठीक ठाक चल रहा था। न जाने कहाँ से शामत आ गई और सब बर्बाद हो गई।

शिकस्त देना (पराजित करना)- शतरंज के खेल में मुझे कोई शिकस्त नहीं दे सकता।

शिगूफा खिलाना/छोड़ना (कोई अनोखी बात करना)- तुम हमेशा कोई-न-कोई नया शिगूफा क्यों छोड़ते रहते हो?

शीशे में अपना मुँह देखना (अपनी योग्यता पर विचार करना)- पहले शीशे में अपना मुँह देखो तब सोचो कि क्या तुम ऐसी सुंदर लड़की के लिए उपयुक्त हो?

शौक चर्राना (इच्छा का तीव्र होना)- तुम्हें अब इस बुढ़ापे में साइकिल चलाने का क्या शौक चर्राया है, कहीं गिर गिरा गए तो हड्डी-पसली टूट जाएगी।

शिकार हाथ लगना (मोटा असामी मिलना)- तुम्हें अच्छा शिकार हाथ लगा है।

शहीद होना (कुर्बान होना)- आजादी के लिए कितने दीवाने शहीद हो गये।

शोभा देना (उचित लगना)- तुम्हारे जैसे व्यक्ति के मुँह में ऐसी बात शोभा नहीं देती।

शोक चर्राना (चाह होना)- इन दिनों मुझे मुर्गी पालने का शौक चर्राया है।

शर्म से गड़ जाना- (अधिक लज्जित होना)

शर्म से पानी-पानी होना- (बहुत लजाना)

शान में बट्टा लगना- (इज्जत में धब्बा लगना)

शैेतान की आँत- (बहुत बड़ा)

श्रीगणेश करना (शुभारम्भ करना)- कोई शुभ दिन देखकर किसी शुभ कर्म का श्रीगणेश करना चाहिए।

षटराग (खटराग) अलापना- (रोना-गाना, बखेड़ा शुरू करना, झंझट करना)

सर्द हो जाना (डरना, मरना)- बड़ा साहसी बनता था, पर भूत का नाम सुनते ही सर्द हो गया।

साँप-छछूंदर की हालत (दुविधा)- पिता अलग नाराज है, माँ अलग। किसे क्या कहकर मनाऊँ ?मेरी तो साँप-छछूंदर की हालत है इन दिनों।

समझ (अक्ल) पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना)- रावण की समझ पर पत्थर पड़ा था कि भला कहनेवालों को उसने लात मारी।

सिक्का जमना (प्रभाव जमना)- आज तुम्हारे भाषण का वह सिक्का जमा कि उसके बाद बाकी वक्ता जमे ही नहीं।

सवा सोलह आने सही (पूरे तौर पर ठीक)- राम की सेना में हनुमान इसलिए श्रेष्ठ माने जाते थे कि हर काम में वे ही सवा सोलह आने सही उतरते थे।

सर धुनना (शोक करना)- राम परीक्षा में असफल होने पर सर धुनने लगी।

सर गंजा कर देना (खूब पीटना)- भागो यहाँ से, नही तो सर गंजा कर दूँगा।

सफेद झूठ (सरासर झुठ)- यह सफेद झूठ है कि मैंने उसे गाली दी।

संसार देखना (सांसारिक अनुभव प्राप्त करना)- गुरुजी ज्ञानी और विद्वान हैं। उन्होंने संसार देखा है।

संसार बसाना (विवाह करके कौटुम्बिक जीवन व्यतीत करना)- शंभू ने अपना संसार बसा लिया है।

संसार सिर पर उठा लेना (बहुत उपद्रव करना)- अंकुर और पुनीत जहाँ भी जाते हैं, संसार सिर पर उठा लेते हैं।

सनीचर सवार होना (बुरे दिन आना)- सुनील पर सनीचर सवार हो गया है तभी वह अपना घर बेच रहा है।

सरकारी मेहमान (कैदी)- मुन्ना झूठे आरोप में ही सरकारी मेहमान बन गया।

सराय का कुत्ता (स्वार्थी आदमी)- सब जानते हैं कि अभिषेक तो सराय का कुत्ता है तभी उसका कोई मित्र नहीं है।

साँप का बच्चा (दुष्ट व्यक्ति)- समर पूरा साँप का बच्चा है।

साँप लोटना (ईर्ष्या आदि के कारण अत्यन्त दुःखी होना)- राजू की सरकारी नौकरी लग गई तो पड़ोसी के साँप लोट गया।

सागपात समझना (तुच्छ समझना)- रामू को सागपात समझना बड़ी भूल होगी, वह तो बी.ए. पास है।

साया उठ जाना (संरक्षक का मर जाना)- सर से साया उठ जाने पर रवि अनाथ हो गया है।

सिर आँखों पर बिठाना (बहुत आदर-सत्कार करना)- घर पर आए गुरुजी को छात्र ने सिर आँखों पर बिठा लिया।

सिर ऊँचा उठाना (इज्जत से खड़ा होना)- अपनी ईमानदारी के कारण मुन्ना समाज में आज सिर ऊँचा उठाए खड़ा है।

सिर खाली करना (बहुत या बेकार की बातें करना)- कल भवेश ने घर आकर मेरा सिर खाली कर दिया।

सिर पर आसमान उठाना (बहुत शोरगुल करना)- माँ के बिना बच्चे ने सिर पर आसमान उठा लिया है।

सिर पर कफ़न बाँधना (मरने के लिए तैयार रहना)- सैनिक सीमा पर सिर पर कफ़न बाँधे रहते हैं।

सिर पर पाँव रख कर भागना (बहुत तेजी से भाग जाना)- पुलिस को देख कर डाकू सिर पर पाँव रख कर भाग गए।

सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना (कार्यारम्भ में विघ्न पड़ना)- यदि मैं जानता कि सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ेंगे तो विवाह के नजदीक ही न जाता।

सिर सफेद होना (बुढ़ापा होना)- अब नरेश का सिर सफेद हो गया है।

सिर पर आ जाना (बहुत नजदीक होना)- परीक्षा मेरे सिर पर आ गयी है, अब मुझे खूब पढ़ना चाहिए।

सिर खुजलाना (बहलाना करना)- सिर न खुजलाओ, देना है तो दो।

सींकिया पहलवान (दुबला-पतला व्यक्ति, जो स्वयं को बलवान समझता है।)- शामू सींकिया पहलवान है फिर भी वह अपने आपको दारासिंह समझता है।

सूरज को दीपक दिखाना (जो स्वयं प्रसिद्ध या श्रेष्ठ हो उसके विषय में कुछ कहना)- आप जैसे व्यक्ति को कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाना हैं।

सूरज पर थूकना (नितान्त निर्दोष व्यक्ति पर लांछन लगाना)- अमर के बारे में कुछ कहना तो सूरज पर थूकना है।

सेर को सवा सेर मिलना (किसी जबरदस्त व्यक्ति को उससे भी बलवान या अच्छा व्यक्ति मिलना)- सेर को सवा सेर मिल गया, अब राजू को मजा आएगा।

सोने की चिड़िया (धनी देश)- हिन्दुस्तान इंग्लैण्ड के लिए सोने की चिड़ियाँ था।

स्वाहा होना (जल जाना, नष्ट या खत्म होना)- कल जरा-सी चिंगारी से सैकड़ों झुग्गियाँ स्वाहा हो गई।

संतोष की साँस लेना (राहत अनुभव करना)- बच्चे को गोद में लेकर नदी पार कर ली तब जाकर संतोष की साँस ली।

सकते में आना (चकित रह जाना)- हामिद मियाँ को इस पार्टी में देखकर वह सकते में आ गई। उसे यकीन ही नहीं होता था कि वह हामिद है।

सठिया जाना (बुद्धि नष्ट हो जाना)- वह अब सठिया गया है, इसलिए बहकी बातें करने लगा है। उसकी बातों का बुरा मत मानो।

सनक सवार होना (किसी काम को करने की धुन लग जाना)- मेरी छोटी बहन को गाना सीखने की सनक सवार हो गई है, इसलिए रोज शाम को विद्यालय जाती है।

सन्न रह जाना (कुछ करते न बनना)- इनकमटैक्स-अधिकारियों को अचानक अपने घर पर देखकर सेठजी सन्न रह गए।

सन्नाटा छाना (सब लोगों का चुप हो जाना, ख़ामोशी छा जाना)- भरी सभा में जब शर्मा जी दहाड़े तो चारों ओर सन्नाटा छा गया।

सबक मिलना (शिक्षा/दंड मिलना)- अच्छा हुआ जो मुरारी को इस बार परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। इससे दूसरे छात्रों को भी सबक मिलेगा।

सब्जबाग दिखाना (झूठी आशाएँ दिलाना)- कुछ एजेंट लोगों को विदेश भेजने की बातें करके सब्जबाग दिखाते हैं और उनसे पैसा लूटते हैं।

समाँ बाँधना (रंग जमाना)- आज लता जी ने कार्यक्रम में समाँ बाँध दिया।

सर्दी खाना (ठंड लग जाना)- कल सुबह मैं बिना मफलर लिए निकल गया और सर्दी खा गया। इस समय तेज बुखार है।

सरपट दौड़ाना (तेज दौड़ाना)- राणा प्रताप का घोड़ा युद्ध में सरपट दौड़ता था।

साँप को दूध पिलाना (दुष्ट को प्रश्रय देना)- नेताजी ने अपनी सुरक्षा के लिए एक गुंडे को रख लिया पर एक दिन उसी गुंडे ने गुस्से में नेताजी का ही खून कर दिया, इसलिए कहा जाता है कि साँप को दूध पिलाना अक्लमंदी नहीं है।

साँप सूँघ जाना (हक्का बक्का रह जाना)- बहुत गुंडागर्दी कर रहे थे, अब थानेदार साहब को देखकर क्यों साँप सूँघ गया?

साँस लेने की फुर्सत न होना (बहुत व्यस्त होना)- आजकल इतना काम है कि साँस लेने की फुर्सत नहीं है, मैं इन दिनों आपके साथ नहीं चल सकता।

सात खून माफ करना (बहुत बड़े अपराध माफ करना)- तुम तो पंडितजी के इतने प्यारे हो कि तुम्हें तो सात खून माफ हैं। तुम कुछ भी कर दोगे तो भी तुमसे कोई भी कुछ नहीं कहेगा।

सात परदों में रखना (छिपाकर रखना)- उसने सेठजी को धमकी दी थी कि यदि वे अपनी बेटी को सात परदों में भी छिपाकर रखेंगे तो भी वह उसे ले जाएगा और उसी से शादी करेगा।

सातवें आसमान पर चढ़ना (घमंड होना)- पैसा आते ही तुम तो सातवें आसमान पर चढ़ गए हो। किसी की इज्जत भी नहीं करते।

सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाना (बहुत डर जाना)- जब उस लड़के ने पिस्तौल निकाल ली तो वहाँ खड़े सब लोगों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।

सिर खाना (व्यर्थ की बातों से तंग करना)- मेरा सिर मत खाओ। मैं वैसे ही परेशान हूँ।

सिर नीचा करना (इज्जत बढ़ाना)- रमानाथ के अकेले बेटे ने अपने पिता का सिर ऊँचा कर दिया।

सिर चढ़ना (अशिष्ट या उदंड होना)- आपके बच्चे बहुत सिर चढ़ गए हैं। किसी की सुनते तक नहीं।

सिर पटकना (पछताना)- पहले तो मेरी बात नहीं मानी अब सिर पटकने से क्या होगा?

सिर पर खड़ा रहना (बहुत निकट रहना)- आप उसे कुछ समय के लिए अकेले भी छोड़ दिया करो। चौबीसों घंटे उसके सिर पर खड़े रहना ठीक नहीं है।

सिर पर तलवार लटकना (खतरा होना)- इस कंपनी में नौकरी करने पर हमेशा सिर पर तलवार ही लटकी रहती है कि कब कोई गलती हुई और नौकरी से निकाल दिए गए।

सिर फिरना (पागल हो जाना)- उसे मत छेड़ो। अगर उसका सिर फिर गया तो तुम लोगों की शामत आ जाएगी।

सिर मुड़ाते ओले पड़ना (कार्य आरंभ करते ही विघ्न पड़ना)- हमने व्यापार आरंभ किया ही था कि पुलिस वालों ने आकर हमारा लाइसेंस ही रद्द कर दिया। इसे कहते हैं सिर मुड़ाते ही ओले पड़ना।

सीधे मुँह बात न करना (घमंड करना)- उसे अपने पैसे का बहुत घमंड हैं। किसी से सीधे मुँह बात तक नहीं करती।

सुनी अनसुनी करना (ध्यान न देना)- इस तरह की बातों को सुनी अनसुनी कर देना चाहिए।

सुनते-सुनते कान पक जाना (एक ही बात को सुनते-सुनते ऊब जाना)- तुम्हारी बातें सुनते-सुनते तो मेरे कान पक गए हैं, अब कुछ मत बोलो।

सुर्खाब के पर लगना (कोई विशेष गुण होना)- उस लड़की में क्या सुर्खाव के पर लगे थे जो मुझे छोड़कर उसे नौकरी मिल गई।

सुईं का भाला बनाना (छोटी-सी बात को बढ़ाना)- इस मामले को यहीं समाप्त करो। इतनी-सी बात का सुईं का भाला मत बनाओ।

सूख कर काँटा हो जाना (बहुत कमजोर हो जाना)- आइ० ए० एस० की तैयार में क्या लगा रहा, वह तो एकदम सूखकर काँटा हो गया है।

सेंध लगाना (चोरी करने के लिए दीवार में छेद करना)- मेरे घर के पीछे की दीवार पर कल रात चोरों ने सेंध लगाने की कोशिश की थी।

सोने पे सुहागा (बेहतर होना)- सेठ दीनानाथ पहले से ही करोड़पति थे और अब उनकी लॉटरी भी निकल आई। इसे कहते हैं सोने पे सुहागा।

सौ बात की एक बात (असली बात, निचोड़)- सौ बात की एक बात यह है कि तू इधर-उधर के धंधे छोड़कर कहीं ठीक से नौकरी कर।

सौदा पटना (भाव ठीक होना)- अगर यह सौदा पट गया तो हम लोग मालामाल हो जाएँगे।

सब्ज बाग दिखाना (व्यर्थ की आशा दिलाना)- भाई ! कब तक सब्ज-बाग दिखाते रहोगे, कुछ मेरा काम भी तो करो।

सितारा चमकना या बुलंद होना (सौभाग्य के दिन आना)- इन दिनों इंदिराजी का सितारा चमक रहा है, बुलंद है।

सुबह का चिराग होना (समाप्ति पर आना)- वह बहुत दिनों से बीमार है। उसे सुबह का चिराग ही समझो।

सिप्पा भिड़ाना- (उपाय करना)

सात-पाँच करना- (आगे पीछे करना)

सैकड़ों घड़े पानी पड़ना- (लज्जित होना)

सन्नाटे में आना/सकेत में आना- (स्तब्ध हो जाना)

सब धान बाईस पसेरी- (सबके साथ एक-सा व्यवहार, सब कुछ बराबर समझना)

सात जनम में- (कभी भी)

सिंह का बच्चा होना- (बड़ा बहादुर होना)

षोडश श्रृंगार करना- (पूरी तरह सजना-धजना)

षटकरम करना- (बहुत झंझट/उपाय करना)

हाथ पैर मारना (काफी प्रयास )- राम कितना मेहनत क्या फिर भी वह परीक्षा में सफल नहीं हुआ।

हाथ मलना (पछताना )- समय बीतने पर हाथ मलने से क्या लाभ ?

हाथ देना (सहायता करना )- आपके हाथ दिये बिना यह काम न होगा।

हाथोहाथ (जल्दी )- यह काम हाथोहाथ होकर रहेगा।

हथियार डाल देना (हार मान लेना)- कारगिल की लड़ाई में पाकिस्तान ने हथियार डाल दिए थे।

हड्डी-पसली एक करना (खूब मारना-पीटना)- बदमाशों ने काशी की हड्डी-पसली एक कर दी।

हाथों के तोते उड़ जाना (भौंचक्का या स्तब्ध हो जाना)- मनोहर की आत्महत्या का समाचार पाकर घर में सबके हाथों के तोते उड़ गए।

हँसी-खेल समझना (किसी काम को सरल समझना)- सतीश पुस्तकें लिखना हँसी-खेल समझता है।

हजम करना (हड़प लेना)- प्रेम के माता-पिता के मरने पर उसकी सारी संपत्ति उसके मामा हजम कर गए।

हथेली पर सरसों जमाना (कोई कठिन काम तुरन्त करना)- जब सीमा ने राजू को दो घंटे में पूरी किताब याद करने को कहा तो राजू ने हथेली पर सरसों जमाने के लिए मना कर दिया।

हवा उड़ना (खबर या अफवाह फैलाना)- एक बार हमारे गाँव में हवा उड़ी थी कि एक पहुँचे हुए महात्मा आए हैं, जो कि सच थी।

हवा के घोड़े पर सवार होना (बहुत जल्दी में होना)- राजू तो हमेशा ही हवा के घोड़े पर सवार रहता है, इसलिए कभी उससे शांति से बात नहीं हो पाती।

हवा बिगड़ना (पहले की सी धाक या मर्यादा न रह जाना)- आजकल पुराने रईसों की हवा बिगड़ गई है।

हवा में किले बनाना (काल्पनिक योजनाएँ बनाना)- शंभू तो हमेशा हवा में किले बनाता रहता है।

हवा से बातें करना (हवा की तरह तेज दौड़ाना)- राणा प्रताप का घोड़ा हवा से बातें करता था।

हाथ का खिलौना (किसी के आदेश के अनुसार काम करने वाला व्यक्ति)- बेचारा राजू इन दुष्टों के हाथ का खिलौना बन गया है।

हाथ पर हाथ धरे बैठना (कुछ कामकाज न करना)- राजू एम.ए. करने के बाद हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

हाथ भर का कलेजा होना (बहुत खुश होना)- अच्छी नौकरी मिलने से राम का हाथ भर का कलेजा हो गया है।

हाथों में चूड़ियाँ पहनना (कायरता का काम करना)- कायर! जाओ, हाथ में चूड़ियाँ पहनकर बैठे रहो।

हालत खस्ता होना (कष्टमय परिस्थिति होना)- बेरोजगारी में धरमचंद की हालत खस्ता है।

हिरण हो जाना (गायब हो जाना)- पुलिस को सामने देखकर शराबी का नशा हिरण हो गया।

हृदय उछलना (बहुत आनन्दित होना)- कन्हैया को चलते देखकर यशोदा का हृदय उछलने लगता था।

हृदय पत्थर हो जाना (निर्दय हो जाना)- आतंकवादियों का हृदय पत्थर हो गया है, वे तो बच्चों को भी मार डालते हैं।

होंठ काटना (क्रोधित होना)- रामू का जवाब सुनकर उसके पिताजी ने होंठ काट लिए।

होम करना (बलिदान करना)- चंद्रशेखर और भगत सिंह ने देश के लिए अपने प्राण होम कर दिए।

हक अदा करना (कर्तव्य पालन करना)- मैंने अपना हक अदा कर दिया है। अब आप अपना कर्तव्य पूरा कीजिए।

हजम करना (हड़प लेना)- मेरा माल तुम इस तरह से हजम नहीं कर सकते। मैं तुम्हें छोड़ूँगा नहीं।

हत्थे चढ़ना (वश में आना)- यदि वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो बच नहीं पाएगा, सीधे फाँसी ही होगी।

हथेली पर जान लिए फिरना (मरने को तैयार रहना)- जो सच में बहादुर होता है, वह हथेली पर जान लिए फिरता है, किसी से नहीं डरता।

हरी झंडी दिखाना (आगे बढ़ने का संकेत करना)- इस योजना के लिए आप हरी झंडी दिखाएँ, तो हम लोग काम शुरू कर सकते हैं।

हक्का-बक्का रह जाना (हैरान रह जाना)- जब मुझे यह खबर मिली कि तुम्हारे पिता जी आतंकवादियों से मिले हुए हैं तो मैं तो हक्का-बक्का रह गया।

हवा बदलना (स्थिति बदलना)- अन्ना हजारे के आंदोलन के कारण हवा बदल चुकी है। अगले चुनाव के परिणाम पहले जैसे नहीं होंगे।

हवाइयाँ उड़ाना (चेहरे का रंग पीला पड़ जाना)- जब सबके सामने उसकी पोल पट्टी खुली तो उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं।

हवाई किले बनाना (काल्पनिक योजनाएँ बनाना)- परिश्रम न कर केवल हवाई किले बनाने वाले कभी सफल नहीं होते।

हाथ को हाथ न सूझना (घना अंधकार होना)- घर में पार्टी चल रही थी कि अचानक बिजली चली गई। चारों ओर अँधेरा छा गया, हाथ को हाथ भी नहीं सूझ रहा था।

हाथोंहाथ बिक जाना (बहुत जल्दी बिक जाना)- करीम अपने खेत से ताजे खरबूज तोड़ कर मंडी में ले गया। सारे खरबूज हाथोंहाथ बिक गए।

हाथ साफ करना (चोरी करना)- बस की भीड़ में मेरी जेब पर किसी ने हाथ साफ कर दिया।

होश उड़ जाना (घबड़ा जाना)- घर पहुँच कर जब मैंने देखा कि माँ बेहोश पड़ी है तो मेरे होश उड़ गए।

हाथ-पाँव फूल जाना (घबरा जाना)- किचिन में थोड़ा-सा काम क्या बढ़ जाता है, मेरी पत्नी के तो हाथ-पैर फूल जाते हैं।

हाथपाई होना (मारपीट होना)- मेरी क्लास के दो बच्चों में आज हाथपाई हो गई और दोनों को चोट लग गई।

हुक्का पानी बंद करना (जाति से बाहर कर देना)- रमाकांत की बेटी ने अंतर्जातीय विवाह किया तो सारे गाँव के लोगों ने उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया।

हेकड़ी निकालना (अभिमान चूर करना)- यदि मुझसे टक्कर ली तो मैं तुम्हारी सारी हेकड़ी निकालूँगा।

होड़ करना (प्रतिस्पर्धा करना)- बच्चों को आपस में हर मामले में होड़ नहीं करनी चाहिए।

होश सँभालना (वयस्क होना, समझदार होना)- बेचारे ने जब से होश सँभाला है तभी से गृहस्थी की चिंता में फँस गया है।

हौसला पस्त होना (हतोत्साहित होना)- जब इतनी मेहनत करने के बाद भी मनोनुकूल परिणाम नहीं मिलता तो हौसला पस्त होना स्वाभाविक ही है।

हौसला बढ़ाना (हिम्मत बढ़ाना)- अध्यापकों को चाहिए कि वे बच्चों का हौसला बढ़ाते रहें तभी बच्चे कुछ अच्छा कर पाएँगे।

हजामत बनाना- (ठगना)

हवा लगना- (संगति का प्रभाव (बुरे अर्थ में)

हवा खिलाना- (कहीं भेजना)

हड़प जाना- (हजम कर जाना)

हल्का होना- (तुच्छ होना, कम होना)

हल्दी-गुड़ पिलाना- (खूब मारना)

हवा पर उड़ना- (इतराना)

हृदय पसीजना- (दयार्द्र होना, द्रवित होना)

हरिश्चन्द्र बनना- (सत्यवादी बनना)

हल्दी लगाना- (शादी होना)

हरियाली सूझना- (ख़ुशी में मग्न)

हवा हो जाना- (गायब हो जाना)

हाँ-में-हाँ मिलाना- (चापलूसी करना)

हाथ लगना- (पाना)

हाथ उठाकर देना- (ख़ुशी से देना)

हाथ काट के देना- (लिखकर दे देना)

हाथ चूमना- (काम देख प्रसन्न होना)

हाथ का मैल होना- (अति तुच्छ होना)

हाथ खींचना- (पीछे हटना)

हाथ जोड़ना- (संबंध न रखना)

हाथ डालना- (हस्तक्षेप करना)

हाथ बँटाना- (मदद करना)

हाथ साफ करना- (चोरी करना)

हाथ से निकल जाना- (अधिकार से जाना)

हाथापाई होना- (मार-पीट होना)

हाथ के तोते उड़ना- (बहुत घबड़ा जाना)

हाय-हाय करना- (संतोष न होना)

हिचकी बँधना- (बहुत रोना)

हुक्का पानी बंद करना- (जाति से निकालना)

हुलिया बिगड़ जाना- (चेहरा विकृत होना)

हेकड़ी दिखाना- (रोब दिखना)

हेटी होना- (अपमान होना)

होठ चाटना- (खाने का लोभ)

हऽ हऽ करना-(बहुत मजे में)

होश की दवा करना- (समझकर बात करना)

होश ठिकाने आना- (घमंड में चूर होना)

हौसला बुलंद होना- (जोश भरा होना)

हाय तोबा करना- (बड़ा परेशान होना)

हँसकर बात उड़ाना- (ध्यान न देखा)

हँसते-हँसते पेट में बल पड़ना- (बहुत हँसना)

आँख या आँखों का तेल निकालना (महीन काम करना जिससे आँखों पर बहुत जोर पड़े)- दिन भर सुई में धागा पिरोते-पिरोते मेरी आँखों आँखों का तेल निकल गया।

आँख-कान खुले रखना (बहुत सर्तक रहना)- आजकल तो हमें हर जगह अपने आँख-कान खुले रखने चाहिए, वरना कोई भी दुर्घटना घट सकती हैं।

आँख का पानी गिरना या आँख का पानी मर जाना (निर्लज्ज होना)- राजू की आँख का पानी मर गया हैं, वह तो अपने पिता के सामने भी बीड़ी पीता हैं।

आँखों की पट्टी खुलना (भ्रम दूर होना)- प्रेम के आँख की पट्टी तब खुली जब ठग उसे ठगकर चला गया।

आँखें निकालना (क्रोधपूर्वक देखना)- अरे मित्र! फूल मत तोड़ो, माली आँखें निकाल रहा हैं।

आँखें नीची होना (लज्जित होना)- जब पुत्र चोरी के जुर्म में पकड़ा गया तो पिता की आँखें नीची हो गई।

आँखें फाड़ कर देखना (आश्चर्य से देखना)- अरे मित्र! आँखें फाड़कर क्या देख रहे हो, ये तुम्हारा ही घर हैं।

आँखें बंद होना (मर जाना)- थोड़ी-सी बीमारी के बाद ही उसकी आँखें बन्द हो गई।

आँखें बिछाना (प्रेम से स्वागत करना)- जब प्रधानमंत्री आए तो स्कूल में सबने आँखें बिछा दीं।

आँखें मूँदकर रखना (बिना सोचे-समझे करना)- अध्यापक ने बच्चों से कहा कि हमें कोई काम आँख मूँदकर नहीं करना चाहिए।

आँखों में चुभना (बुरा लगना)- मैंने मित्र से कहा कि मित्र, ये रंग आँखों में चुभ रहा हैं, तुम दूसरे रंग की शर्ट पहन लो।

आँखें खुलना (होश आना, सावधान होना)- जनजागरण से हमारे शासकों की आँखें अब खुलने लगी हैं।

आँखें चार होना (आमने-सामने होना)- जब आँखें चार होती है, मुहब्बत हो ही जाती है।

आँखें मूँदना (मर जाना)- आज सबेरे उसके पिता ने आँखें मूँद ली।

आँखें चुराना (नजर बचाना, अपने को छिपाना)- मुझे देखते ही वह आँखें चुराने लगा।

आँखों में खून उतरना (अधिक क्रोध करना)- बेटे के कुकर्म की बात सुनकर पिता की आँखों में खून उतर आया।

आँखों में गड़ना (किसी वस्तु को पाने की उत्कट लालसा)- उसकी कलम मेरी आँखों में गड़ गयी है।

आँखें फेर लेना (उदासीन हो जाना)- मतलब निकल जाने के बाद उसने मेरी ओर से बिलकुल आँखें फेर ली है।

आँख मारना (इशारा करना)- उसने आँख मारकर मुझे बुलाया।

आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना)- वह बड़ों-बड़ों की आँखों में धूल झोंक सकता है।

आँखें बिछाना (प्रेम से स्वागत करना)- मैंने उनके लिए अपनी आँखें बिछा दीं।

आँखों का काँटा होना (शत्रु होना)- वह मेरी आँखों का काँटा हो रहा है।

आँखों में पानी होना (शर्म-लिहाज होना)- रमेश की आँखों में पानी होता तो वह सबके सामने बड़े भाई का अनादर न करता।

आँखों में समाना (हमेशा ध्यान में रहना)- मुरली मनोहर श्याम तो मीराबाई की आँखों में समाए हुए थे।

आँखों से अंगारे/आग बरसना (अत्यधिक क्रोध आना)- जब रावण ने सीता का हरण कर लिया तो श्री राम की आँखों से अंगारे बरसने लगे थे।

आँखों से उतरना (मूल्य या सम्मान कम होना)- जब से विवेक ने अपने पिता को जवाब दिया हैं तब से रामू उनकी आँखों से उतर गया हैं।

आँखों से चिनगारियाँ निकलना (गुस्से या क्रोध से आँखें लाल होना)- जब रोहन ने मुझसे अपशब्द कहे तो मेरी आँखों से चिनगारियाँ निकलने लगी।

आँखों में सरसों फूलना (हरियाली ही हरियाली दिखाई देना अथवा मन उल्लास से भरना)- जब राहुल की लॉटरी खुल गई तो उसकी आँखों में सरसों फूलने लगी।

आँखों से परदा हटना (असलियत का पता लगना)- जब मुझे यह ज्ञात हुआ कि सादा ढंग से रहने वाला शेखर अमीर हैं तो मेरी आँखों से परदा हट गया।

आँखों पर बिठाना (बहुत आदर-सत्कार करना)- जब मोहन के घर कोई मेहमान आता हैं तो वह उसे आँखों पर बिठाकर रखता हैं।

आँखें आना (आँखों में लाली/सूजन आ जाना)- मेरी आँखें आ गई हैं इसलिए मैंने काला चश्मा लगा रखा है।

आँख उठाना (नुकसान करने की कोशिश करना)- यदि तुम्हारी ओर किसी ने आँख भी उठाई तो मैं उसे छोड़ूँगा नहीं।

आँख-कान खुले रखना (सतर्क रहना)- यहाँ यह पता करना कठिन है कि कौन मित्र है और कौन शत्रु। अतः हमेशा आँख-कान खुले रखो।

आँखें पथरा जाना (राह देखते-देखते थक जाना)- कृष्ण के लौटकर आने की प्रतीक्षा में गोपियों की आँखें पथरा गई।

आँखों पर पर्दा पड़ना (भले-बुरे की पहचान न होना)- क्या तुम्हारी आँखों पर पर्दा पड़ा है जो तुम्हें यह भी दिखाई नहीं देता कि तुम्हारा बेटा आजकल क्या गुल खिला रहा है ?

आँखों में घर करना (मन में जगह बना लेना)- अच्छे बच्चे सभी अध्यापकों की आँखों में घर कर लेते हैं।

आँखों में चर्बी छाना (घमंड में चूर होना)- रिश्वत और बेईमानी का पैसा उसे क्या मिला है, उसकी आँखों में तो चर्बी चढ़ गई है।

आँख लगना (प्रेम करना, जरा-सी नींद आना)- आँख लगी ही थी कि अचानक फोन की घंटी सुनकर वह उठ बैठा।

आँखों में रात काटना (चिंता/कष्ट के कारण सो न पाना)- पूनम के पति को पुलिसवाले न जाने क्यों थाने ले गए। वह रात भर नहीं लौटा, बेचारी पूनम की तो सारी रात आँखों में ही कटी।

आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना)- चोर पुलिसवाले की आँखों में धूल झोंककर गायब हो गया।

आँख दिखाना (क्रोध करना)- मुझे क्यों आँखें दिखा रहे हो, मैंने तो तुम्हारी शिकायत नहीं की थी ?

आँखें ठंढी होना- (इच्छा पूरी होना)

आँखें लड़ना- (देखादेखी होना, प्रेम होना)

आँखें लाल करना- (क्रोध की नजर से देखना)

आँखें थकना- (प्रतीक्षा में निराश होना)

आँखों में खटकना- (बुरा लगना)

आँखें नीली-पीली करना- (नाराज होना)

आँख का अंधा, गाँठ का पूरा- (मूर्ख धनवान)

आँखों की किरकिरी होना- (शत्रु होना)

आँखों का प्यारा या पुतली होना- (बहुत प्यारा होना)

आँखों का पानी ढल जाना- (लज्जारहित हो जाना)

आँखें सेंकना- (किसी की सुन्दरता देख आँखें जुड़ाना)

आँखें गड़ाना- (दिल लगाना, इच्छा करना)

आँख फड़कना- (सगुन उचरना)

आँख रखना- (ध्यान रखना)

आँख में पानी रखना- (मुरौवत रखना)

अँगूठा चूमना (खुशामद करना)- साहित्यिक भी जब शासकों का अँगूठा चूमते हैं, तो बड़ा दुःख होता है।

अँगूठा दिखाना (मौके पर धोखा देना)- चालबाजों से बचकर रहो, वे अँगूठा दिखाना खूब जानते हैं।

अँगूठे पर मारना (परवाह न करना)- तुम्हारे जैसे कितनों को मैं अँगूठे पर मारता हूँ।

अँगूठा नचाना- (चिढाना)

आँसू पोंछना- (धीरज बँधाना)

आँसू बहाना- (खूब रोना)

आँसू पी जाना- (दुःख को छिपा लेना)

ओठ चाटना- (स्वाद की इच्छा रखना)

ओठ मलना- (दण्ड देना)

ओठ चबाना- (क्रोध करना)

ओठ सूखना- (प्यास लगना)

ऊँगली उठना (बदनाम करना)- भले पर कौन उँगली उठा सकता है ?

ऊँगली पकड़ते पहुँचा पकड़ना (थोड़ा झटककर अधिक झटकने का प्रयास करना)- लोभियों से सावधान रहो, वे ऊँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना जानते हैं।

पाँचों उँगलियाँ घी में होना (मौज-मस्ती में रहन)- वह तिकड़मी सरकारी ठीकेदार हुआ कि पाँचों उँगलियाँ घी में।

सीधी ऊँगली से घी न निकलना- (भलमनसाहत से काम न होना)

कानों में ऊँगली देना- (किसी बात को सुनने की चेष्टा न करना)

कान खोलना (सावधान करना)- मैंने उसके कान खोल दिये। अब वह किसी के चक्कर में नहीं आयेगा।

कान खड़े होना (होशियार होना)- दुश्मनों के रंग-ढंग देखकर मेरे कान खड़े हो गये।

कान फूंकना (दीक्षा देना, बहकाना)- मोहन के कान सोहन ने फूंके थे, फिर उसने किसी की कुछ न सुनी।

कान लगाना (ध्यान देना)- उसकी बातें कान लगाने योग्य हैं।

कान भरना (पीठ-पीछे शिकायत करना)- तुम बराबर मेरे खिलाफ अफसर के कान भरते हो।

कान में तेल डालना (कुछ न सुनना)- मैं कहते-कहते थक गया, पर ये कान में तेल डाले बैठे हैं।

कान पर जूँ न रेंगना (ध्यान न देना, अनसुनी करना)- सरकार तो बड़ी-बड़ी बातें कहती है, मगर अफसरों के कान पर जूँ नहीं रेंगती।

कान काटना (बढ़कर काम करना)- उसे छोटा न समझो, भाषण देने में तो वह बड़े-बड़ों के कान काटता है।

कान देना (ध्यान देना)- शिक्षकों की बातों पर कान दीजिए।

कान पकना (व्यर्थ बकवास सुनते रहने से चिढ)- किसी व्रत पर जब चारों ओर लाउडस्पीकरों पर बेसुरा अष्टयाम कीर्तन होता है, तो शहर-बस्ती के हम-आप भलेमानसों की क्या बात; सात लोक पार बैठे परमात्मा के भी कान पक जाते हैं।

कान पकड़ना (अनुचित न करने की प्रतिज्ञा करना)- अब से मैं कान ऐंठता हूँ कि कभी ऐसी गुस्ताखी न करूँगा।

कान उमेठना- (शपथ लेना)

कानों कान खबर होना- (बात फैलना)

कलेजा निकाल कर रख देना (हृदय की बात कहना)- ‘प्रणय-पत्रिका’ के एक-एक गीत में बच्चन ने अपनी कल्पित प्रेयसी के प्रति कलेजा निकालकर रख दिया है।

कलेजा ठंढा होना (डाह पूरा होने पर संतोष)- कुणाल के अंधा भिखारी होने पर उसका कलेजा ठंडा हुआ।

कलेजा काढ़ना (प्रिय वस्तु का चला जाना)- उसने मेरी पांडुलिपि क्या खो दी, मेरा कलेजा काढ़ लिया।

कलेजा फटना (ईर्ष्या होना)- मुझे क्या सरकारी नौकरी मिल गयी कि मेरे एक घरवारी सहयोगी का कलेजा ही फटने लगा।

कलेजा टूक-टूक होना (हृदय पर गहरा आघात पहुँचना)- नृप हरिश्चंद्र की विपत्तियों को देखकर किसका कलेजा टूक-टूक नहीं होता ?

कलेजा मुँह को आना (अत्यंत आतुरता)- उसकी बीमारी देखकर कलेजा मुँह को आता है।

कलेजे पर साँप लोटना (किसी की उन्नति याद कर जलन होना)- राम के राज्याभिषेक की खबर पर कैकयी की दासी मंथरा तक के कलेजे पर साँप लोटने लगा।

कलेजे पर पत्थर रखना (दिल मजबूत करना)- छोटे भाई विभीषण की दगाबाजी पर रावण ने कलेजे पर पत्थर रख लिया, इसके सिवा उसके पास चारा ही क्या था।

कलेजा चीरकर दिखाना (पूर्ण विश्र्वास दिलाना)- तुम्हीं मेरे सब कुछ हो, यह मैं कलेजा चीरकर दिखा सकता हूँ।

कलेजे से लगाना- (प्यार करना, छाती से चिपका लेना)

कलेजा काँपना- (डरना)

कलेजा थामकर रह जाना- (अफसोस कर रह जाना)

नाक कट जाना (प्रतिष्ठा नष्ट होना)- पुत्र के कुकर्म से पिता की नाक कट गयी।

नाक काटना (बदनाम करना)- भरी सभा में उसने मेरी नाक काट ली।

नाक-भौं चढ़ाना (क्रोध अथवा घृणा करना)- तुम ज्यादा नाक-भौं चढ़ाओगे, तो ठीक न होगा।

नाक में दम करना (परेशान करना)- शहर में कुछ गुण्डों ने लोगों की नाक में दम कर रखा है।

नाक का बाल होना (अधिक प्यारा होना)- मैनेजर मुंशी की न सुनेगा तो किसकी सुनेगा ?वह तो आजकल उसकी नाक का बाल बना हुआ है।

नाक रगड़ना (दीनतापूर्वक प्रार्थना करना)- उसने मालिक के सामने बहुत नाक रगड़ी, पर सुनवाई न हुई।

नाकों चने चबवाना (तंग करना)- भारतीयों ने अंगरेजों को नाकों चने चबवा दिये।

नाक पर मक्खी न बैठने देना (निर्दोष बचे रहना)- उसने कभी नाक पर मक्खी बैठने ही न दी।

नाक पर गुस्सा (तुरन्त क्रोध)- गुस्सा तो उसकी नाक पर रहता है।

नाक रखना (प्रतिष्ठा रखना)- क्रिकेट में जय ने कॉमर्स कॉलेज की नाक रख ली।

नाक-भौं सिकोड़ना (घृणा करना, सहन न कर पाना)- वह तो मुझे देखते ही नाक-भौं सिकोड़ने लगता है।

नाक-कान काटना (बहुत अधिक अपमानित करना)- उन्होंने अपने मित्रों के अपमान के बदले अपनी चतुराई से कितने ही सामंतों के सरे-दरबार नाक-कान काटे।

नाक ऊँची होना (प्रतिष्ठा बढ़ना)- पिछले टेस्ट-क्रिकेट में जीत के कारण हमारी नाक ऊँची हो गयी।

नाक रहना (इज्जत बचना)- भीम ने दुश्शासन को पछाड़कर द्रौपदी की नाक रख ली।

मुँह छिपाना (लज्जित होना)- वह मुझसे मुँह छिपाये बैठा है।

मुँह पकड़ना (बोलने से रोकना)- लोकतन्त्र में कोई किसी का मुँह नहीं पकड़ सकता।

मुँह उतरना (उदास होना)- परीक्षा में असफल होने पर श्याम का मुँह उतर आया।

मुँह पर कालिख लगना (कलंकित होना)- चोरी करते पकड़े जाने पर राजू के मुँह पर कालिख लग गई।

मुँह पर ताला लगना (चुप रहने के लिए विवश होना)- कक्षा में अध्यापक के आने पर सब छात्रों के मुँह पर ताला लग जाता है।

मुँह पर थूकना (बुरा-भला कहना)- कालू की करतूत देखकर सब उसके मुँह पर थूक गए।

मुँह फुलाना (अप्रसन्नता या असंतुष्ट होकर रूठ कर बैठना)- शांति सुबह से ही अपना मुँह फुलाए घूम रही है।

मुँह सिलना (चुप रहना)- मैंने तो अपना मुँह सिल लिया है। तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारे विरुद्ध कुछ नहीं बोलूँगा।

मुँह काला करना (कलंकित होना)- दुश्चरित्र महिलाएँ न जाने कहाँ-कहाँ मुँह काला कराती फिरती है।

मुँह चुराना (सम्मुख न आना)- इस तरह समाज में कब तक मुँह चुराते फिरोगे। जाकर प्रधान जी से अपनी गलती की माफी माँग लो।

मुँह जूठा करना (थोड़ा-सा खाना/चखना)- यदि भूख नहीं है तो कोई बात नहीं। थोड़ा-सा मुँह जूठा कर लीजिए।

मुँहतोड़ जबाब देना (ऐसा उत्तर देना कि दूसरा कुछ बोल ही न सके)- मैंने ऐसा मुँहतोड़ जबाब दिया कि सबकी बोलती बंद हो गई।

मुँह निकल आना (कमजोरी के कारण चेहरा उतर जाना)- एक सप्ताह की बीमारी में ही उसका मुँह निकल आया है।

मुँह की बात छीन लेना (दूसरे के मन की बात कह देना)- आपने यह बात कहकर तो मेरे मुँह की बात छीन ली। मैं भी यही बात कहना चाहता था।

मुँह में खून लगना (अनुचित लाभ की आदत पड़ना)- इस थानेदार के मुँह में खून लग गया है। बेचारे गरीब सब्जी वालों से भी हफ़्ता-वसूली करता है।

मुँह मोड़ना (उपेक्षा करना)- जब ईश्वर ही मुँह मोड़ लेता है तब दुनिया में कोई सहारा नहीं बचता।

मुँह लगाना (बहुत स्वतंत्रता देना)- ऐसे घटिया लोगों को मैं मुँह नहीं लगाता।

मुँह बंद कर देना (शांत कराना)- तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो

मीठी छुरी (छली-कपटी मनुष्य)- वह तो मीठी छुरी है, मैं उसकी बातों में नहीं आती।

मुँह अँधेरे (बहुत सवेरे)- वह नौकरी के लिए मुँह अँधेरे निकल जाता है।

मुँह काला होना (अपमानित होना)- उसका मुँह काला हो गया, अब वह किसी को क्या मुँह दिखाएगा।

मुँह की खाना (हारना/पराजित होना)- इस बार तो राजू पहलवान ने मुँह की खाई है, पिछली बार वह जीता था।

मुँह धो रखना (आशा न रखना)- यह चीज अब मिलने को नही मुँह धो रखिए।

मुँह में पानी आना (लालच होना)- मिठाई देखते ही उसके मुँह में पानी भर आया।

मुँह पर (या चेहरे पर) हवाई उड़ना) (घबराना)- मास्टर साहब की आहट पाते ही उसके मुँह पर हवाई उड़ने लगी।

मुँह में लगाम न होना (बिना समझे बोलना)- जिसके मुँह में लगाम नहीं, उससे सँभलकर बात करो।

मुँह मीठा करना (शकुन-सूचक मिठाई खिलाना। भाई ! मुँह मीठा कराओ, तुम्हें लड़का हुआ है।

मुँह माँगी मुराद पाना (इच्छानुकूल वस्तु पाना)- यह सुलक्षणा पत्नी ! मुँह माँगी मुराद पा गये हो यार !

मुँह खुलना- (उदण्डतापूर्वक बातें करना, बोलने का साहस होना)

मुँह देना, या डालना- (किसी पशु का मुँह डालना)

मुँह बन्द होना- (चुप होना)

मुँह से लार टपकना- (बहुत लालची होना)

मुँह काला होना- (कलंक या दोष लगना)

मुँह धो रखना- (आशा न रखना)

मुँहफट हो जाना- (निर्लज्ज होना)

मुँह रखना- (लिहाज रखना)

मुँहदेखी करना- (पक्षपात करना)

मुँह चुराना- (संकोच करना)

मुँह चाटना- (खुशामद करना)

मुँह भरना- (घूस देना)

मुँह लटकना- (रंज होना)

मुँह आना- (मुँह की बीमारी होना)

मुँह की खाना- (परास्त होना)

मुँह सूखना- (भयभीत होना)

मुँह ताकना- (किसी का आसरा करना)

मुँह से फूल झड़ना- (मधुर बोलना)

मुँह में घी-शक्कर- (किसी अच्छी भविष्यवाणी का अनुमोदन करना)

मुँह से मुँह मिलाना- (हाँ-में-हाँ मिलाना, बही-खाता आदि में हिसाब सही न लिखकर भी जमा-खर्च या उत्तर सही लिख देना )

दाँत दिखाना (खीस काढ़ना)- खुद ही देर की और अब दाँत दिखाते हो।

दाँत गिनना (उम्र पता लगाना)- कुछ लोग ऐसे है कि उनपर वृद्धावस्था का असर ही नहीं होता। ऐसे लोगों के दाँत गिनना आसान नहीं।

दाँत निपोरना (गिड़गिड़ाना)- क्यों दाँत निपोरकर भीख माँग रहे हो, काम क्यों नहीं करते ?

दाँत पीसना (बहुत क्रोधित होना)- रमेश तो बात-बात पर दाँत पीसने लगता है।

दाँत काटी रोटी होना (अत्यन्त घनिष्ठता होना या मित्रता होना)- आजकल राम और श्याम की दाँत काटी रोटी है।

दाँत खट्टे करना (परास्त करना, हराना)- महाभारत में पांडवों ने कौरवों के दाँत खट्टे कर दिए थे।

दाँतों तले उँगली दबाना (दंग रह जाना)- जब एक गरीब छात्र ने आई.ए.एस. पास कर ली तो सब दाँतों तले उँगली दबाने लगे।

दाँत गड़ाना(कुछ हड़पने के लिए दृढ़ होना)- मेरी बगिया पर तुम दाँत जमाये हो; मैं फौजदारी तक देख लूँगा।

दाँत से दाँत बजना (बहुत जाड़ा पड़ना)- इस साल दिसंबर में दाँत बजने की नौबत आ गयी।

दाँत तोड़ना (बेकाम करना)- साँप के दाँत तोड़ दो, और उसे मदारी की तरह नचाओ।

दाँतों में जीभ-सा रहना (शत्रुओं से घिरा रहना)- लंका में विभीषण दाँतों में जीभ-से रहते थे।

दाँत खट्टे करना- (पस्त करना)

तालू में दाँत जमना- (बुरे दिन आना)

दाँत जमाना- (अधिकार पाने के लिए दृढ़ता दिखाना)

दाँत गिनना- (उम्र बताना)

बात का धनी (वायदे का पक्का)- मैं जानता हूँ, वह बात का धनी है।

बात की बात में (अति शीघ्र)- बात की बात में वह चलता बना।

बात चलाना (चर्चा चलाना)- कृपया मेरी बेटी के ब्याह की बात चलाइएगा ।

बात तक न पूछना (निरादर करना)- मैं विवाह के अवसर पर उसके यहाँ गया, पर उसने बात तक न पूछी।

बात बढ़ाना (बहस छिड़ जाना)- देखो, बात बढाओगे तो ठीक न होगा।

बात बनाना (बहाना करना)- तुम्हें बात बनाने से फुर्सत कहाँ ?

गर्दन उठाना (प्रतिवाद करना)- सत्तारूढ़ सरकार के विरोध में गर्दन उठाना टेढ़ी खीर है।

गर्दन पर सवार होना (पीछा न छोड़ना)- जब देखो, तब मेरी गर्दन पर सवार रहते हो।

गर्दन काटना (जान से मारना, हानि पहुँचाना)- वह तो उनकी गर्दन काट डालेगा। झूठी शिकायत कर क्यों गरीब की गर्दन काटने पर तुले हो ?

गर्दन पर छुरी फेरना- (अत्याचार करना)

सिर उठाना (विरोध में खड़ा होना)- देखता हूँ, मेरे सामने कौन सिर उठाता है ?

सिर भारी होना (सिर में दर्द होना, शामत सवार होना)- मेरा सिर भारी हो रहा है। किसका सिर भारी हुआ है जो इसकी चर्चा करें ?

सिर पर सवार होना (पीछे पड़ना)- तुम कब तक मेरे सिर पर सवार रहोगे ?

सिर से पैर तक (आदि से अन्त तक)- तुम्हारी जिन्दगी सिर से पैर तक बुराइयों से भरी है।

सिर पीटना (शोक करना)- चोर उस बेचारे की पाई-पाई ले गये। सिर पीटकर रह गया वह।

सिर पर भूत सवार होना (एक ही रट लगाना, धुन सवार होना)- मालूम होता है कि घनश्याम के सिर पर भूत सवार हो गया है, जो वह जी-जान से इस काम में लगा है।

सिर फिर जाना (पागल हो जाना)- धन पाकर उसका सिर फिर गया है।

सिर चढ़ाना (शोख करना)- बच्चों को सिर चढ़ाना ठीक नहीं।

सिर आँखों पर बिठाना (बहुत आदर-सत्कार करना)- घर पर आए गुरुजी को छात्र ने सिर आँखों पर बिठा लिया।

सिर ऊँचा उठाना (इज्जत से खड़ा होना)- अपनी ईमानदारी के कारण मुन्ना समाज में आज सिर ऊँचा उठाए खड़ा है।

सिर खाली करना (बहुत या बेकार की बातें करना)- कल भवेश ने घर आकर मेरा सिर खाली कर दिया।

सिर पर आसमान उठाना (बहुत शोरगुल करना)- माँ के बिना बच्चे ने सिर पर आसमान उठा लिया है।

सिर पर कफ़न बाँधना (मरने के लिए तैयार रहना)- सैनिक सीमा पर सिर पर कफ़न बाँधे रहते हैं।

सिर पर पाँव रख कर भागना (बहुत तेजी से भाग जाना)- पुलिस को देख कर डाकू सिर पर पाँव रख कर भाग गए।

सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ना (कार्यारम्भ में विघ्न पड़ना)- यदि मैं जानता कि सिर मुँड़ाते ही ओले पड़ेंगे तो विवाह के नजदीक ही न जाता।

सिर सफेद होना (बुढ़ापा होना)- अब नरेश का सिर सफेद हो गया है।

सिर पर आ जाना (बहुत नजदीक होना)- परीक्षा मेरे सिर पर आ गयी है, अब मुझे खूब पढ़ना चाहिए।

सिर खुजलाना (बहलाना करना)- सिर न खुजलाओ, देना है तो दो।

सिर खाना (व्यर्थ की बातों से तंग करना)- मेरा सिर मत खाओ। मैं वैसे ही परेशान हूँ।

सिर नीचा करना (इज्जत बढ़ाना)- रमानाथ के अकेले बेटे ने अपने पिता का सिर ऊँचा कर दिया।

सिर चढ़ना (अशिष्ट या उदंड होना)- आपके बच्चे बहुत सिर चढ़ गए हैं। किसी की सुनते तक नहीं।

सिर पटकना (पछताना)- पहले तो मेरी बात नहीं मानी अब सिर पटकने से क्या होगा?

सिर पर खड़ा रहना (बहुत निकट रहना)- आप उसे कुछ समय के लिए अकेले भी छोड़ दिया करो। चौबीसों घंटे उसके सिर पर खड़े रहना ठीक नहीं है।

सिर पर तलवार लटकना (खतरा होना)- इस कंपनी में नौकरी करने पर हमेशा सिर पर तलवार ही लटकी रहती है कि कब कोई गलती हुई और नौकरी से निकाल दिए गए।

सिर फिरना (पागल हो जाना)- उसे मत छेड़ो। अगर उसका सिर फिर गया तो तुम लोगों की शामत आ जाएगी।

सिर मुड़ाते ओले पड़ना (कार्य आरंभ करते ही विघ्न पड़ना)- हमने व्यापार आरंभ किया ही था कि पुलिस वालों ने आकर हमारा लाइसेंस ही रद्द कर दिया। इसे कहते हैं सिर मुड़ाते ही ओले पड़ना।

सिर चढ़कर बोलना (साक्षात् प्रभावशाली होना)- उसकी लेखनी में ऐसा जादू है, जो सिर चढ़कर बोलता है।

सिर गंजा कर देना (बहुत पीटना)- बदमाशी करोगे तो सिर गंजा कर दूँगा।

सिर ऊखल में देना (जान-बूझकर आफत मोल लेना)- जब सिर ऊखल में दिया तो मूसल का क्या डर ?

सिर का बोझ टलना (निश्र्चिंत होना)- बेटी का ब्याह हुआ, तो समझो सिर का बोझ टला।

सिर आँखों पर होना- (सहर्ष स्वीकार होना)

सिर खुजलाना- (बहाना करना)

सिर धुनना- (शोक करना)

हाथ पैर मारना (काफी प्रयास )- राम कितना मेहनत क्या फिर भी वह परीक्षा में सफल नहीं हुआ।

हाथ मलना (पछताना )- समय बीतने पर हाथ मलने से क्या लाभ ?

हाथ देना (सहायता करना )- आपके हाथ दिये बिना यह काम न होगा।

हाथ का खिलौना (किसी के आदेश के अनुसार काम करने वाला व्यक्ति)- बेचारा राजू इन दुष्टों के हाथ का खिलौना बन गया है।

हाथ पर हाथ धरे बैठना (कुछ कामकाज न करना)- राजू एम.ए. करने के बाद हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

हाथ भर का कलेजा होना (बहुत खुश होना)- अच्छी नौकरी मिलने से राम का हाथ भर का कलेजा हो गया है।

हाथों में चूड़ियाँ पहनना (कायरता का काम करना)- कायर! जाओ, हाथ में चूड़ियाँ पहनकर बैठे रहो।

हाथ को हाथ न सूझना (घना अंधकार होना)- घर में पार्टी चल रही थी कि अचानक बिजली चली गई। चारों ओर अँधेरा छा गया, हाथ को हाथ भी नहीं सूझ रहा था।

हाथ साफ करना (चोरी करना)- बस की भीड़ में मेरी जेब पर किसी ने हाथ साफ कर दिया।

हाथ पर हाथ धरे बैठना (बेकार बैठे रहना)- हाथ पर हाथ धरे बैठने से सफलता पाँव नहीं चूमती।

हाथ लगाना (आरंभ करना)- उसने मकान में हाथ लगा दिया है।

हाथ मलना (पछताना)- काम बिगड़ जाने पर हाथ मलने से क्या फायदा।

हाथ उठाना (पीटना)- बच्चों पर ज्यादा हाथ उठाओगे तो वे शोख हो जाएँगे।

हाथ खींचना (सहायता बंद करना)- उसने इन दिनों अनेक संस्थाओं से हाथ खींच लिया है।

हाथ फैलना (याचना करना)- हाथ फैलाने की आदत बुरी हैं।

हाथ साफ करना (चुरा लेना)- वह जिस बारात में जाता है, बिना हाथ साफ किये नहीं लौटता।

हाथ लगना (काम में आना)- तुम भला किसी के हाथ लगोगे।

हाथ पर सरसों जमाना (शीघ्र चाहना)- हाथ पर सरसों जमाने से काम खराब हो जाता है।

हाथ आना- (अधिकार में आना)

हाथ खींचना- (अलग होना)

हाथ खुजलाना- (किसी को पीटने को जी चाहना

हाथ देना- (सहायता देना)

हाथ पसारना- (माँगना)

हाथ बँटाना- (मदद करना)

हाथ गरम करना- (घूस देना)

हाथ चूमना- (हर्ष व्यक्त करना)

हाथ धोकर पीछे पड़ना- (जी-जान से लग जाना)

हाथ मारना- (उड़ा लेना, लाभ उठाना)

हाथ धो बैठना- (आशा खो देना)

हाथापाई करना- (मुठभेड़ होना)

हाथ पकड़ना- किसी स्त्री को पत्नी बनाना, आश्रय देना)

अलाउदीन का चिराग- (आश्चर्यजनक वस्तु)

इन्द्र का अखाड़ा- (रास-रंग से भरी सभा)

इन्द्रासन की परी- (बहुत सुंदर स्त्री)

कर्ण का दान- (महादान)

कारूं का खजाना- (अतुल धनराशि)

कुबेर का धन/कोश- (अतुल धनराशि)

कुम्भकर्णी नींद- (बहुत गहरी, लापरवाही की नींद)

गोबर गणेश- (मूर्ख, बुद्धू, निकम्मा)

गोरख धंधा- (बखेड़ा, झंझट)

चाणक्य नीति- (कुटिल नीति)

छुपा रुस्तम- (असाधारण किन्तु अप्रसिद्ध गुणी)

तीसमार खां बनना- (अपने को बहुत शूरवीर समझना और शेखी बघारना)

तुगलकी फरमान- (जनता की सुविधा-असुविधा का ख्याल किये बिना जारी किया गया शासनादेश

दूर्वासा का रूप- (बहुत क्रोध करना)

दुर्वासा का शाप- (उग्र शाप)

धन-कुबेर- (अधिक धनवान)

नादिरशाही हुक्म- (मनमाना हुक्म)

नारद मुनि- (इधर-उधर की बातें कर कलह कराने वाला व्यक्ति)

परशुराम का कोप- (अत्यधिक क्रोध)

पांचाली चीर- (बड़ी लंबी, समाप्त न होनेवाली वस्तु)

ब्रह्म पाश/फांस- (अत्यधिक मजबूत फंदा)

भगीरथ प्रयत्न- (बहुत बड़ा प्रयत्न)

भीष्म प्रतिज्ञा- (कठोर प्रतिज्ञा)

महाभारत- (भयंकर झगड़ा, भयंकर युद्ध)

महाभारत मचना- (खूब लड़ाई-झगड़ा होना)

यमलोक भेजना- (मार डालना)

राम बाण- (तुरन्त प्रभाव दिखाने या कभी न चूकने वाली चीज)

राम राज्य- (ऐसा राज्य जिसमें बहुत सुख हो)

राम कहानी- (अपनी कहानी, आपबीती)

राम जाने- (मुझे नहीं मालूम, एक प्रकार की शपथ खाना)

राम नाम सत्त हो जाना- (मर जाना)

रामबाण औषध- (अचूक दवा)

राम राम करना- (नमस्कार करना, भगवान का नाम जपना)

लंका काण्ड- (भयंकर विनाश)

लंका ढहाना- (किसी का सत्यानाश कर देना)

लक्ष्मण रेखा- (अलंघ्य सीमा या मर्यादा)

विभीषण- (घर का भेदी/ भेदिया)

शेखचिल्ली के इरादे- (हवाई योजना, अमल में न आने वाले (कार्य रूप में परिणत न होने वाले) इरादे

सनीचर सवार होना- (दुर्भाग्य आना, बुरे दिन आना)

सुदामा की कुटिया- (गरीब की झोंपड़ी)

हम्मीर हठ-(अनूठी आन)

हातिमताई- (दानशील, परोपकारी)

अंक भरना (गोद भर लेना)- माँ ने दौड़कर युद्ध से लौटे अपने इकलौते बेटे को अंक में भर लिया।

अंक लगाना (आलिंगन करना)- ज्योंही मोहन परीक्षा में प्रथम हुआ, उसे उसके मित्र सोहन ने अंक लगा लिया।

अंग उभरना (यौवन के लक्षण दिखाई पड़ना)- तेरहवाँ वर्ष लगते ही कुंती के अंग उभरने लगे।

अंग टूटना (थकान की पीड़ा)- काम करते-करते अंग टूटने लगे।

अंग मोड़ना (शरीर के अंगों को लज्जावश छिपाना)- नाटक में उतरना है, तो अंग मोड़ने से काम नहीं चलेगा।

कमर कसना (दृढ़ निश्र्चय करना)- विजय चाहते हो, तो युद्ध के लिए कमर कस लो।

कमर सीधी करना (परिश्रम के बाद विश्राम)- अभी तो टेस्ट परीक्षा समाप्त हुई है; जरा कमर सीधी करने दो, फिर पढ़ाई चलेगी।

कमर टूटना (निरुत्साह होना)- परीक्षा में कई बार फेल होने से उसकी कमर ही टूट गयी।

गले मढ़ना (इच्छा के विरुद्ध कुछ मत्थे थोप देना)- उसने अच्छा कहकर पूरे छह सौ लिये और अपना रद्दी रेडियो मेरे गले मढ़ दिया।

गले पर छुरी फेरना (अपनों का ही बहुत नुकसान करना)- इन दिनों भाई ही भाई के गले पर छुरी फेर रहा है।

घुटना टेकना (हार मानना)- वीर बराबर बात पर हथियार टेक सकते है, घुटने नहीं।

गाल फुलाना (रूठना)- कैकेयी ने गाल फुला लिया, तो दशरथ परेशान हो गये।

गाल बजाना (डींग हाँकना)- किसके आगे गाल बजा रहे हो ? आखिर मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ, बीस वर्ष बड़ा। मुझसे तुम्हारा कुछ छुपा भी है क्या ?

चेहरा उतरना (चेहरे पर रौनक न रहना)- जाली सर्टिफिकेट का भेद खुलते ही बेचारे डॉक्टर का चेहरा उतर गया।

चेहरा बिगाड़ना (बहुत पीटना)- फिर बदमाशी की, तो चेहरा बिगाड़ दूँगा।

चेहरे पर हवाई उड़ना (घबरा जाना)- आप सफ़र में जिसके चेहरे पर हवाई उड़ते देखें, समझ लें कि वह बेटिकट नया शोहदा है।

जबान देना (वचन देना)- मैंने उसे जबान दी है, अतः होस्टल छोड़ने पर अपनी चौकी उसे ही दूँगा।

जबान खींचना (उद्दंड बोली के लिए दंड देना)- बकवास किया, तो जबान खींच लूँगा।

जबान पर लगाम न होना (किसके आगे क्या कहना चाहिए, इसकी तमीज न होना)- जिसकी जबान पर लगाम नहीं, उससे मुँह लगाना ठीक नहीं।

जबान चलाना (अनुचित शब्द निकालना)- यदि जबान चलाओगे, तो जबान खींच लूँगा।

जान छुड़ाना, पिंड छुड़ाना (पीछा छुड़ाना)- उसने किसी तरह उन गुंडों से जान छुड़ायी।

जान पर खेलना, जान को जान न समझना, जान लड़ाना (वीरता का काम करना)- पाकिस्तान के साथ लड़ाई में पठानिया जान पर खेल गये, उन्होंने जान को जान न समझा, वे जान लड़ा गये।

जान का जंजाल होना (अप्रिय होना)- यह गाड़ी तो मेरे लिए जान का जंजाल हो गयी।

जान खाना (तंग करना)- देखो भाई, जान मत खाओ, मौका मिलते ही तुम्हारा काम कर दूँगा।

जी खट्टा होना (पहले जिससे रुचि, उससे अरुचि होना)- किसी काम के न होकर खुशामद पर निर्वाह खोजनेवालों से एक-न-एक दिन जी खट्टा तो होता ही है।

जी छोटा करना (मन उदास करना)- इस नुकसान पर जी छोटा करने से काम नहीं चलेगा, परिश्रम करते चलो, काम बनेगा ही।

जी जलना (क्रोध आना)- बेलगाम लाउडस्पीकरों की अठपहरा भौं-भौं से किसका जी न जलेगा।

जी-जान लड़ाना (अंतिम परिश्रम करना)- विद्या सीखनी हो तो विद्यासागर की तरह शुरू से जी-जान लड़ाकर सीखो।

जी धकधक करना (आतंकित रहना)- बचपन में भूत का नाम सुनते ही मेरा जी धकधक करने लगता था।

जी भर आना (ह्रदय द्रवित होना)- अरविंद की ‘सावित्री’ पढ़ो। स्त्री-धर्म के उस चरम पुरुषार्थ पर तुम्हारा जी न भर आए, तो कहना।

छाती (जी) जुड़ाना (परम तृप्ति)- मित्र की उन्नति देखकर मेरी छाती जुड़ा गयी (मेरा जी जुड़ा गया)।

छाती (जी) जलना (डाह होना)- किसी की छाती जले, परवाह नहीं, मुझे तो आगे बढ़ते जाना है।

छाती फुलाना (अभिमान करना)- रमेंद्र पुलिस-अफसर क्या हुआ, हमेशा छाती फुलाये चलता है।

छाती पीटना (विलाप करना)- बेटे के मरते ही माँ छाती पीटने लगी।

छाती पर साँप लोटना (ईर्ष्या करना)- राम की सफलता देख श्याम की छाती पर साँप लोट गया।

छाती पर कोदो दलना (प्रतिशोधात्मक कष्ट पहुँचाना)- अपना धर्म मानना सांप्रदायिकता नहीं है, सांप्रदायिकता है दूसरे धर्मवालों की छाती पर कोदो दलना।

टाँग अड़ाना (फिजूल दखल देना)- गद्य आता है न ? नहीं आता ? तो फिर पद्य में क्या टाँग अड़ाने लगे ? जाओ, पहले गद्य दुरुस्त करो।

टाँग पसारकर सोना (निश्चिंत सोना)- सिकंदर उमड़ती वितस्ता को बहत्तर मील उत्तर बढ़कर अँधेरी रात में जबकि सेना समेत तैरकर पार कर रहा था, उस समय सराय जेहलम के भलेमानुस राजा पुरु रनिवास में टाँग पसारकर सोये हुए थे।

दम मारना (लेना)- आराम करना, सुस्ताना। दम लेने दो, फिर आगे बढ़ेंगे।

दम में दम आना (स्थिर होना)- चोर जब भागकर झाड़ी में छिपा तब उसके दम में दम आया।

दम घुटना (अटकना)- (साँस बंद होना)- इस कुप्प कमरे में तो मेरा दम घुटता है।

दम बाँधना (हिम्मत करना)- जबतक दम नहीं बाँधोगे, तबतक दुनिया में ठीक से जी नहीं पाओगे।

दम भरना (दावा करना)- अपनी तारीफ करना। दम भरते थे कि दो कोस तो चल ही लूँगा। अब डेढ़ मील पर ही बाप-बाप करने लगे।

दिमाग खाना या चाटना (अपनी गर्ज व्यर्थ बके जाना)- आजकल अधिकांश लोग दिमाग चाटनेवाले होते हैं। न खुद कुछ समझने को तैयार और न किसी को कुछ समझने देने को तैयार।

दिमाग चढ़ना या आसमान पर होना (बहुत अधिक घमंड होना)- रावण ने शिव को साधा क्या, उसका दिमाग आसमान पर हो गया।

दिमाग आसमान से उतरना (अभिमान दूर होना)- रामदूत हनुमान ने जब अकेले अशोकवन उजाड़ डाला, लंका राख कर दी, तो पहले-पहल रावण का दिमाग आसमान से उतरा।

दिल कड़ा करना (हिम्मत बाँधना, साहस करना)- भाई। विपत्ति किसपर नहीं आती है। दिल कड़ा करो।

दिल का गवाही देना (मन में किसी बात की संभावना या औचित्य का निश्र्चय होना)- जब दिल गवाही न दे, तो औरों की सलाह पर न चलो।

दिल जमना (चित्त लगना)- इन दिनों किसी काम में मेरा दिल जमता ही नहीं।

दिल ठिकाने होना (मन में शांति, संतोष या धैर्य होना)- जबतक दिल ठिकाने न हो तबतक किसी काम में हाथ न लगाओ।

दिल बुझना (चित्त में किसी प्रकार की उत्साह या उमंग न रह जाना)- जिन्दगी में उसकी इतनी हार हुई कि उसका दिल ही बुझ गया।

दिल से दूर करना (भुला देना, विस्मरण)- वे तुम्हारी नजरों से दूर क्या हुए, दिल से दूर कर दिये गये।

दिल की कली खिलना (अत्यानंद की प्राप्ति)- जब जहाँगीर ने अनारकली को देखा, तो उसके दिल की कली खिल उठी।

दिल चुराना (मन मोह लेना)- पहली मुलाकात ही में मेहरुत्रिसा ने सलीम का दिल चुरा लिया।

दिल देना (प्रेम करना)- जिसने दिल दिया, उसने दर्द लिया।

दिल दरिया होना (उदार होना)- जो कोई उनके दरवाजे पर आता है खाली हाथ नहीं लौटता। क्यों न ऐसा हो, उनका दिल दरिया जो ठहरा।

दिल की गाँठ खोलना (मनमुटाव दूर होना)- जब तक तुम दिल की गाँठ नहीं खोलोगे, तबतक वह खुलेगा कैसे ?

नजर आना (दिखाई देना)- क्या बात है कि हजरत नजर ही नहीं आते ?

नजर रखना (ध्यान रखना)- भाई ! इस गरीब लड़के पर नजर रखा करो।

नजर लड़ाना (साक्षात् प्रेम में पड़ना)- अपने समय में अर्जुन इतने सुंदर थे कि जिन सुंदरियों से उनकी नजर लड़ी, वे उनके लिए हाय-हाय ही करती रहीं।

नजर चुराना (आँख बचाना)- आखिर आप हमसे नजर चुराकर कहाँ जाएँगे ?

नजर लगना (कुदृष्टि, सुदृष्टि। इस बन-ठन पर कहीं नजर न लग जाय। नजर लागी राजा तोरे बँगले पै।

नजर दौड़ाना (सर्वत्र देखना)- नजर दौड़ाओगे तो कोई-न-कोई काम मिल ही जाएगा।

नजर करना (भेंट करना)- उसने हाकिम को एक दुशाला नजर किया।

नजर से गिरना (ह्रदय से दूर होना)- बेईमान आदमी तो नजर से गिर ही जाता है।

नजर पर चढ़ना (पसंद आ जाना)- यह घड़ी मेरी नजर पर चढ़ गयी है।

पलक लगना (सो जाना)- आदमी जो ठहरा, सारे दिन और सारी रात कैसे जागता; तीन बजे सुबह तो पलक लग ही गयी।

पलक-पाँवड़े बिछाना (अत्यंत आदर से स्वागत करना)- शबरी राम के लिए न मालूम कब से पलक-पाँवड़े बिछाये थी।

पसीने-पसीने होना (लज्जित होना)- जबसे मैंने उसकी यह चोरी पकड़ी तबसे वह चोरी करता हो या नहीं, किन्तु मुझे देखकर पसीने-पसीने हो जाता है।

पसीने की जगह खून बहाना (कम के बदले अधिक कुर्बानी देना) मैं वैसा आदमी हूँ, जो अपने मित्रों के लिए पसीने की जगह खून बहाने को तैयार रहता है।

पाँव उखड़ जाना (पराजित होना)- थानेश्र्वर की लड़ाई में पृथ्वीराज की सेना के पाँव उखड़ गये।

पाँव चूमना (पूजा करना, खुशामद करना)- आज यदि परमवीर अब्दुल हमीद यहाँ होते, तो हम सभी उनके पाँव चूमते।

पाँव भारी होना (गर्भवती होना)- जब राजा ने सुना कि रानी के पाँव भारी हुए तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

पाँव तले की मिट्टी (धरती) खिसकना (स्तब्ध हो जाना)- जब सट्टे में उसे एक लाख रुपये का घाटा लगा तो उसके पाँव तले की मिट्टी खिसक गयी।

पाँव खींचना (रुकावट डालना)- आजकल पाँव बढ़ानेवाले दो-चार होते हैं, तो पाँव खींचनेवाले दस-बीस।

पाँव फिसलना (गलती होना)- जवानी में तो बहुतों के पाँव फिसल जाते हैं।

पाँवों में पर लगना (बहुत तेज चलना)- मोहन की वंशी सुनकर गोपियों के पाँवों में पर लग गये।

पीठ दिखाना (हारकर भाग जाना)- बहादुर मैदाने-जंग में पीठ नहीं दिखाते।

पीठ ठोकना (प्रोत्साहन देना)- छात्रों की बराबर पीठ ठोकें, वे कमाल कर दिखाएँगे।

पीठ पर होना (सहायक होना)- जब आप मेरी पीठ पर हैं तो फिर डर किस बात का ?

पीठ फेरना (मुँह मोड़ना)- गाढ़े समय में तुमने भी पीठ फेर ली।

प्राण-पखेरू का उड़ना (मृत्यु हो जाना)- एक-न-एक दिन सभी के प्राण-पखेरू उड़ ही जायेंगे।

प्राण सूख जाना (भयभीत हो जाना)- यम का नाम लेते ही कितनों के प्राण सूख जाते हैं।

प्राण डालना (सजीव-सा कर देना)- कलाकार जिस मूर्ति की रचना करता है उसके प्राण पहले अपने में डाल लेता है, तभी वह मूर्ति में प्राण डाल पाता है।

प्राण कंठगत होना (मृत्यु निकट होना)- प्राण कंठगत होने पर भी धीर विचलित नहीं होते।

बाँह गहना या पकड़ना (अपनाना)- निबाहो बाँह गहे की लाज।

बाँह देना (सहारा देना)- निःसहायों को सदा बाँह दो।

बाँह टूटना (आश्रयहीन होना)- मालिक क्या गये, मेरी बाँह ही टूट गयी।

बाल-बाल बचना (साफ बच जाना)- इस रेल-दुर्घटना में वह बाल-बाल बच गया।

बाल की खाल निकालना (व्यर्थ टीका-टिप्पणी करना)- कुछ लोग कुछ करते हैं, तो कुछ लोग केवल बाल की खाल ही निकालते रहते हैं।

बाल बाँका न करना (हानि न पहुँचा पाना)- बाल न बाँका करि सकै, जो जग बैरी होय।

मन हरा होना (प्रसन्न होना)- तुम्हारी बात सुनकर मन हरा हो गया।

मन से उतरना (अप्रिय हो जाना)- अँगूठी भूलते ही शकुंतला दुष्यंत के मन से उत्तर गयी।

मन डोलना (लालच होना)- मेनका को देखकर विश्र्वामित्र का भी मन डोल गया था।

मन खट्टा होना (मन फिर जाना)- इन दिनों तुमसे मेरा मन खट्टा हो गया।

मन टूटना (साहस नष्ट होना)- जिसका मन टूट गया, उसका जीना बेकार है।

मन की आँखें खोलना (उचित दृष्टि)- बाबा, मन की आँखें खोल।

मन टटोलना (किसी के विचारों से अवगत होने के लिए प्रयत्न करना)- वे तुम्हारा मन टटोलते थे कि तुम अभी विवाह करोगे या पढ़ाई समाप्त करने के बाद।

मन बढ़ना (अनुचित शह)- तुम्हारे लाड़-प्यार ने लड़के का मन बढ़ा दिया है। तभी तो वह इतना तुनुकमिजाज है।

मन चलना (इच्छा होना)- आज खिचड़ी खाने को मन चल गया।

मन मारकर बैठ जाना (निराश होना)- वीर अपनी पराजय पर मन मारकर बैठते नहीं।

मन की मन में रहना (इच्छा पूरी न होना)- पंडितजी भी सेठजी के साथ नैनीताल जाना चाहते थे। पर, सेठ-सेठानी उन्हें बिना पूछे चल दिये तो उनकी मन की मन में ही रह गयी।

मन के लड्डू (फोड़ना, तोड़ना) खाना- काल्पनिक प्रसन्नता से प्रसन्न होना। व्यावहारिक लोग मन के लड्डू नहीं फोड़ते।

मन बहलाना (मनोरंजन करना)- सिनेमा देखना क्या है, मन बहलाना है।

मन भारी करना (मन से अप्रसन्न होना)- लड़का तुम्हारी बैदकी न चलाकर खुद डॉक्टर बनेगा, यह तो और अच्छी बात है। इसमें मन क्या भारी किये हुए हो ?

मन फटना (विरक्त होना)- उससे मेरा मन ही फट गया।

मन मिलना (प्रेम या मित्रता होना)- जिससे मन नहीं मिला, उससे संबंध कैसा ?

मन में बसना (प्रिय लगना)- अच्छी सूरत मन में बस ही जाती है।

मन मैला करना (मन में किसी के प्रति कुछ कटुता रखना)- अपनों से मन मैला करना कैसा ?

मन रखना (प्रसन्न करना)- मैं वहाँ जाना नहीं चाहता था किंतु तुम्हारा मन रखने के लिए वहाँ जाना पड़ा।

मन लगाना (प्रवृत्त होना)- पढ़ने में मन लगाओ।

मुट्ठी में करना (वश में करना)- उसने तो साहब को मुट्ठी में कर लिया है।

मुट्ठी गरम करना (रिश्र्वत देना)- कचहरी में मुट्ठी गरम करो, फिर तो काम चाँदी।

मुट्ठी में रखना (काबू में रखना)- इंद्रियों को मुट्ठी में रखो।

मूँछें उखाड़ना (घमंड चूर कर देना)- छोटे से लड़के ने ऐसा ताना कसा कि उस अधेड़ की मूँछें उखाड़ ली।

मूँछों पर ताव देना (अभिमान प्रदर्शित करना, चिंतामुक्त होना)- कुश्ती में बाजी मारकर पहलवान मूँछों पर ताव दे रहा है।

तीन-तेरह होना (तितर-बितर होना)- माधो के मरते ही उसके सारे लड़के तीन-तेरह हो गये।

नौ-दौ ग्यारह होना (भाग जाना)- आज उसे बहुत मार पड़ती, खैरियत हुई कि वह नौ-दो ग्यारह हो गया था।

चार चाँद लगाना (और सुंदर लगना)- गोरे तन पर नीली साड़ी, मानो चार चाँद लग गये।

उन्नीस-बीस का अंतर होना (थोड़े का फर्क)- उन दोनों लड़कों की प्रतिभा में उन्नीस-बीस का अंतर है।

एक का तीन बनाना (अनुचित लाभ उठाना)- जब युद्ध छिड़ता है तो व्यापारी एक का तीन बनाने लग जाते हैं।

एक लाठी से सबको हाँकना (उचित-अनुचित का ज्ञान नहीं होना)- भाई! सभी लड़के एक तरह के नहीं होते अतः सभी को एक लाठी से क्यों हाँकते हो ?

डेढ़ चावल की खिचड़ी अलग पकाना (अलग रहना)- डेढ़ चावल की खिचड़ी अलग पकाने से कोई सामाजिक कार्य नहीं हो सकता।

दो टूक कहना (साफ-साफ कहना)- आपको भला लगे या बुरा, मैं तो दो टूक ही कहूँगा।

दो नाव पर पैर रखना (अनिश्चित विचार का मनुष्य)- दो नाव पर पैर रखने से सफलता नहीं मिलती।

तीनों लोक सूझना (आँखों के आगे अँधेरा छाना)- जमींदारी छिन जाने पर राय साहब को तीनों लोक सूझने लगे।

तीन कौड़ी का होना (बरबाद होना)- लड़का कुसंगति में पड़ कर तीन कौड़ी का हो गया।

तीन-तेरह में न रहना (किसी झगड़ा-फ़साद में न रहना)- भाई हम तो अपना काम करते हैं। तीन-तेरह में नहीं रहते।

चारो खाने चित्त गिरना (बुरी तरह हार जाना)- उसने ऐसी चाल चली कि प्रतिपक्षी चारो खाने चित्त गिर गये।

पाँचवाँ सवार होना (अपने को बड़ों में गिनना)- एकाध पुस्तक लिखकर कुछ लोग पाँचवा सवार होना चाहते हैं।

छौ-पाँच में पड़ना (असमंजस में पड़ जाना)- मैं इस पद को स्वीकार करूँ या न, छौ-पाँच में पड़ गया हूँ।

सात घाटों का पानी पीना (अनुभवी होना)- तुम उसे ठग नहीं सकते, वह तो सात घाटों का पानी पी चुका है।

आठ-आठ आँसू बहाना (बहुत रोना)- पंडितजी की मृत्यु पर सभी आठ-आठ आँसू बहाने लगे।

लाल-पीला होना (क्रुद्ध होना)- भाई मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा जो लाल-पीले हो रहे हो।

लाल बत्ती जलना (दीवाली होना)- अब उस सेठ की बात क्या पूछते हो ? उसके यहाँ तो लाल बत्ती जल गयी।

लाली रह जाना (प्रतिष्ठा निभ जाना)- चलो ! जीत जाने से मुँह की लाली तो रह गयी।

स्याह होना (उदास होना)- डाँट पड़ते ही बेचारा स्याह हो गया।

त्रिशंकु बनना (न इधर का न उधर का)- मैं सोच ही नहीं पाता क्या करूँ, त्रिशंकु बना हूँ।

लंकादहन करना (नेस्तनाबूद करना)- यदि पाकिस्तान हमसे भिड़ा, तो लंकादहन कर देंगे।

ब्रह्मास्त्र छोड़ना (अंतिम अस्त्र छोड़ना)- सत्याग्रह का नारा क्या था, ब्रह्मास्त्र छोड़ना था।

धनुष तोड़ना (अत्यंत कठिन कार्य करना)- देखें इस मुक्ति आंदोलन का धनुष कौन तोड़ता है ?

भीष्म प्रतिज्ञा करना (कसम खाना या दृढ़ निश्र्चय करना)- महात्मा गाँधी ने देश को स्वतंत्र करने की भीष्म प्रतिज्ञा की थी।

विभीषण बनना (देशद्रोही बनना)- विभीषण बनना देश-प्रेमियों को शोभा नहीं देता।

महाभारत मचना (झगड़ा होना)- आज दोनों दलों में महाभारत मच गया।

राम कहानी कहना (अपनी दुःख-गाथा सुनाना। कभी आप निश्र्चिंत रहेंगे, तो अपनी राम कहानी सुनाऊँगा।

लक्ष्मी नारायण करना (भोग लगाना)- पंडितजी ने जब लक्ष्मी नारायण किया, तो हमलोगों को प्रसाद मिला।

वेद-वाक्य मानना (प्रमाण मानना)- मैं गुरु की आज्ञा को वेद-वाक्य मानता हूँ।

अंग्रेजी शब्दों के मेल से बने मुहावरे

अंडर-ग्राउंड होना- (फरार होना)

एजेंट होना- (दलाली करना)

ऐक्टिंग करना- (दिखावा करना)

क्यू में लगा रहना- (बहुत देर तक प्रतीक्षा करना)

कंट्रोल करना- (नियंत्रण करना)

ग्रीन सिगनल देना- (आदेश देना)

ट्रंप-कार्ड छोड़ना- (अंतिम कोशिश लगा देना)

ड्यूटी बजाना- (काम पर केवल समय काटना)

डबल रोल करना- (दोतरफा मेल का बरताव करना)

डिक्टेटर होना- (अत्याचारी होना)

तूफान मेल छोड़ना- (जल्दी करना)

नंबर आना- (अवसर मिलना)

नंबर मारना- (आगे निकल जाना)

पलस्तर करना- (पक्का करना)

पॉकेट गरम करना- (घूस देना, लेना)

पॉलिश करना- (साफ करना, चापलूसी करना)

पार्सल करना- (कहीं भेज देना)

पेंशन देना, लेना- (छुट्टी देना, बिना मेहनत का पैसा लेना)

पैरेड करना- (यूँ ही चक्कर मारना)

फिट करना, होना- ( बिलकुल ठीक उतरना)

फ़िल्म-स्टार बनना- (बहुत दिखावटी होना)

फोर टवेंटी करना, होना- (धोखा देना, धोखेबाज होना)

बटरिंग करना- (चापलूसी करना)

ब्लैंक चेक काटना- (मुँहमाँगी चीज देना)

ब्लैंक मारकेटिंग करना- (चोरबाजारी करना)

ब्लैकमेल करना- (भ्रष्टाचार करना, भ्रष्ट लेनदेन करना)

ब्रेक लगाना, लगना- (रुकावट डालना, रुकावट में पड़ना)

बैक-ग्राउंड में रहना- (छिपकर काम करना)

बैरंग लौटाना, लौटना- (खाली हाथ, असफल)

बैलून हो जाना- (फूलकर कुप्पा होना)

वीटो पावर लगाना- (अपना निषेधाधिकार प्रयुक्त करना)

मार्के की बात कहना- (महत्त्वपूर्ण बात बताना)

मूड आफ होना- (मन नहीं लगना)

राउंड टेबुल करना- (विचार विनिमय करना)

रिंग-लीडर होना- (दुष्टों में) प्रमुख होना।

रकार्ड तोड़ना- (विजयी होना)

रेकार्ड की तरह बजना- (बिना विराम बोलते जाना)

रेकार्ड रखना- (हिसाब रखना)

रेकार्ड कायम करना- (बेजोड़ सफलता प्राप्त करना)

लाटसाहब बनना- (अपने को बड़ा समझना)

लौटरी निकलना- (एकाएक बहुत धन मिल जाना)

लैस होना- (तैयार होना, संयुक्त होना)

लेक्चर छाँटना- (केवल बोलना)

सोडावाटर का जोश होना- (क्षणिक जोश होना)

स्टेपनी बनना- (किसी का दुमछल्ला बनना)

हुलिया टाइट करना- (दिमाग दुरुस्त करना)

हिट होना- (अत्यंत सफल होना)

हीरो बनना- (नेता बनना)

हाइटवाश करना- (इच्छा पर पानी फेर देना)

हैंडनोट लिखना- (पक्का प्रमाण दे देना)

हिंदी मुहावरे [Part 1]

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